माई सिटी रिपोर्टर
करनाल। दिवाली नजदीक आते ही लाखों प्रवासी नौकरीपेशा लोगों के चेहरों पर घर जाने की खुशी के साथ महंगे किराये से चिंता की लकीरें भी हैं। निजी कंपनियों की बसों की टिकट चार गुना तक महंगी हो गई है। ट्रेनों में जगह नहीं है।
बसों में केंद्र बिंदू दिल्ली से यूपी, चंडीगढ़, हिमाचल प्रदेश व जम्मू-कश्मीर की ओर सभी जगहों के बस किराये में इजाफा हुआ है। हालांकि कुछ कूपन व ऑफर के साथ यात्रियों को कम रेट में भी टिकट मिल रहे हैं। सामान्य दिनों में वॉल्वो से 716 रुपये में दिल्ली से लखनऊ का बुक होने वाला टिकट अब 2839 रुपये में मिल रहा है। इसी तरह से जम्मू के उधमपुर का जो टिकट 800 रुपये में बुक होता था, अब वह 2812 रुपये का है। स्लीपर बस का किराया इससे भी अधिक है।
यह हाल सिर्फ दिल्ली-लखनऊ रूट तक सीमित नहीं है। यूपी-बिहार बॉर्डर पर जाने वाली अधिकांश प्राइवेट बसें इसी तरह के दाम वसूल रही हैं। दिवाली के ठीक पहले के दिनों में प्राइवेट बसों की बुकिंग वेबसाइट्स पर लोड बढ़ा है।
पहले जाने और फिर आने की तिथियों में भीड़
ट्रैवल एजेंसियों और ऑनलाइन प्लेटफॉर्म पर 18, 19, 21 और 22 अक्तूबर को दिल्ली से निकलने वाली ज्यादातर बसें पहले से ही बुक हो चुकी हैं। कई दिन पहले बुकिंग करने वाले यात्रियों को राहत मिली, लेकिन अब आखिरी मौके पर टिकट लेने वालों को कहीं ज्यादा चुकाना पड़ रहा है। इसी तरह से त्योहार खत्म होने के बाद 26 अक्तूबर के बाद के किराये भी ऐसे ही महंगे मिल रहे हैं।
अब यह है किराया स्थिति
- दिल्ली से कानपुर : सामान्य दिनों में बस का किराया 700 रुपये होता है, अब 2900 रुपये है।
- दिल्ली से वाराणसी : 3200 रुपये किराया है।
- दिल्ली से लखनऊ : 749 रुपये वाला टिकट अब 2839 रुपये में मिल रहा है।
- दिल्ली से आगरा : 346 रुपये वाला टिकट अब 1324 रुपये में मिल रहा है।
- दिल्ली से चंडीगढ़ : 400 रुपये वाला टिकट 1582 रुपये में मिल रहा है।
- दिल्ली से ऊधमपुर : 800 रुपये वाला टिकट 2812 रुपये में मिल रहा है।
पहले रेल टिकट की वेटिंग अब महंगा किराया
सेक्टर-4 के औद्योगिक क्षेत्र में नौकरी करने वाले सुनील और विवेक ने बताया कि उन्हें लखनऊ जाना है लेकिन अब बस का टिकट महंगा हो गया है। काम में व्यस्त रहने के कारण वे पहले टिकट बुक नहीं कर पाए थे। सितंबर माह में उन्होंने पहले रेल का टिकट बुक करने का प्रयास किया था लेकिन वेटिंग लंबी थी। अब घर जाना है तो किराया महंग देना मजबूरी हो गया है। ऊधमपुर जाने वाले जितेंद्र का कहना है कि प्राइवेट बस वाले इस मौके का फायदा उठाते हैं। सरकारी बसों का तो टाइमटेबल भी फिक्स नहीं है कि कब चलेगी, कब रद्द हो जाएगी।