यमुनानगर। एसएस जैन सभा में मॉडल टाउन चल रहे चातुर्मास के 52 वें दिन महा साध्वी सुचेता महाराज ने श्रद्धालुओं को जन्म-मरण के बारे में बताया। उन्होंने बताया कि ऐसा कोई स्थान या कुल नहीं है जहां आत्मा ने अनंत बार जन्म-मरण ना किया हो, अतः निश्चित है हमने सभी के संग अनंत प्रकार के संबंध अनेक बार बनाए हैं।
उन्होंने कहा कि संबंधों के इस सच को हृदय में धारण कर लेना चाहिए ताकि ना शत्रुता के लिए कोई स्थान रहे और ना ही व्यक्ति कोई भी आपका दुश्मन बने। भिन्न-भिन्न योनियों में जन्म मरण करती हुई आत्मा शुभ एवं अशुभ तत्व के लेनदेन के कारण माता-पिता भाई-बहन पत्नी पुत्र आदि अनेक संबंधों में बदलता है तथा कर्मों के जाल को बुनकर कर्मों के चक्रव्यूह में फंसती है।
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उन्होंने कहा कि कभी सोचा है कि इन संबंधों से ज्यादा अहमियत किस चीज की है। एक बार एक रईस व्यक्ति के घर में शॉर्ट सर्किट होने के कारण आग लगी तो तत्काल दमकल केंद्र से फायर ब्रिगेड बुलाई गई। देखते-देखते आग ने भीषण रूप धारण कर लिया।
सुरक्षा के लिए लिफ्ट का इस्तेमाल नहीं हो सकता था। वहीं बचाव दल शीघ्रता से ऊपर चढ़ रहा था और नीचे खड़े सुरक्षाकर्मी की ओर से यह सूचना प्रसारित की जा रही थी।