नगर निगम द्वारा दो साल पहले काफी रकम खर्च कर शहर के विभिन्न वार्डों में फुटपाथ पर टाइलें बिछाई गई लेकिन अब इन टाइलों पर घास उग आई है। कई स्थानों पर तो फुटपाथ का लेवल सड़कों से भी नीचा रह गया है। इससे सड़कों का पानी भी फुटपाथ पर जमा होने लगा है। वहीं, निगम अधिकारियों ने अपनी इस गलती पर पर्दा डालने के लिए उन टाइलों को उखाड़कर नए सिरे से काम शुरू कर दिया है।
मामले को लेकर बड़े गोलमाल की आशंका जाहिर की जा रही है। अहम बात यह है कि जिस वार्ड में टाइलें उखाड़ी जा रही हैं, वह वार्ड मेयर रेणुबाला गुप्ता का है और सड़क का शहर की सबसे पाश क्षेत्र माल रोड (ठंडी सड़क) है। इस पर निगमायुक्त ने कड़ा संज्ञान लेते हुए संबंधित अधिकारियों व ठेकेदारों को लेटर जारी कर स्पष्टीकरण मांगा है। निगमायुक्त का कहना है कि मामले की तह तक जाया जाएगा और जिसका भी कसूर होगा, उनके खिलाफ सख्त एक्शन लिया जाएगा।
नगर निगम द्वारा वर्ष 2014 में मेयर के वार्ड-12 में 30 लाख रुपये की लागत सड़कों के साथ लगती फुटपाथ पर इंटर लॉकिंग टायलें बिछवाई थी। इसके लिए निगम द्वारा तीन ठेकेदार, राजेश कंस्ट्रक्शन, परवीन गोयल व शिवालिक कंस्ट्रक्शन को टेंडर जारी किया था। लेकिन ठेकेदारों ने फुटपाथ पर नियम के मुताबिक गटका पत्थर नियमों के अनुसार न डालते हुए सीधे ही टाइलें बिछा दी।
इससे दो सालों में ही टाइलें अंदर धंस गई और उनपर नीचे से घास उग आई। इतना ही नहीं फुटपाथ का लेवल कई जगह पर सड़कों से नीचा रहने की वजह से जलभराव की समस्या होने लगी। अब निगम ने फिर से उन टाइलों को उखाड़कर नए सिरे से काम शुरू करवाने का निर्णय लिया है। इससे निगम को लाखों रुपये के नुकसान का अनुमान है।
ठेकेदारों ने बिना बेस के ही बिछा दी थी टाइलें
नगर निगम द्वारा शहर के वार्डों में लाखों रुपये की लागत से सड़कों के साथ-साथ इंटर लॉकिंग टाइलों से फुटपाथ का निर्माण करवाया था। लेकिन निगम अधिकारियों की लापरवाही के चलते ठेकेदारों ने बिना बेस बनाए ही टाइलें बिछा दी थी या फिर खानापूर्ति के लिए टाइलों के नीचे पत्थर रोड़े का नाममात्र बेस होने की वजह से दो सालों में ही टाइलों के नीचे से घास निकल आई है। नियम के मुताबिक इंटर, लॉकिंग टायल बिछाने से पहले गटका व पत्थर का बेस तैयार करना होता है, लेकिन ठेकेदारों ने नाममात्र गटका डालकर ही टाइलें बिछा दी थी।
अब निगमायुक्त ने भी तीनों ठेकेदारों व संबंधित अधिकारियों से स्पष्टीकरण मांगा है। निगमायुक्त ने कहा कि अब सड़कों के निर्माण में कोई भी अनियमितता बर्दाश्त नहीं की जाएगी। इसके लिए अब निगम कार्यालय में एक सड़क निर्माण में प्रयोग होने वाले मैटीरियल की मात्रा का एक सैंपल रखा जाएगा तथा शहर की जनता को इसके प्रति जागरूक भी किया जाएगा, ताकि निर्माण कार्य के दौरान कोई भी अनियमितता मिलने पर उसकी शिकायत कर सकें । इसके लिए सभी वार्डों को एक शिकायत नंबर भी दिया जाएगा।
ठेकेदारों की हो चुकी पेमेंट
बताया जाता है कि जिन ठेकेदारों ने इन फुटपाथों को बनाया था, उनकी पेमेंट भी हो चुकी है। ऐसे में उन ठेकेदारों को पत्र के माध्यम से नोटिस भेजा गया है। वहीं, वर्ष 2014 में हुए कार्यों को पास कराने वाले अधिकारियों की कार्यप्रणाली पर भी सवाल उठ रहे हैं। अगर मामले की सही तरीके से जांच हुई तो काफी समय से एक ही सीट पर जमे कई अधिकारियों पर गाज गिरना तय है।
शहर की सड़कों पर खर्च हुए 67 करोड़ रुपये
डिप्टी मेयर मनोज वधवा ने बताया कि निगम द्वारा अब तक हाउस की बैठकों में 115 करोड़ के विकास कार्यों पर मोहर लगाई है। इसमें करीब 65 से 65 करोड़ रुपये शहर की सड़कों व फुटपाथ पर खर्च हुए हैं। ऐसे में यदि निगम अधिकारियों व ठेकेदारों की लापरवाही हुई है, तो निगम को एक तगड़ा झटका है। वे इस मामले की जांच करवाएंगे। इसमें जो दोषी होगा उसे बक्शा नहीं जाएगा।
थर्ड पार्टी से करवाएंगे मॉनिटरिंग
शहर में अब तक हुए विकास कार्यों में काफी अनियमितताएं मिली है। इससे निगम को भी करोड़ों रुपये का नुकसान हुआ है। लेकिन अब निगम द्वारा विकास कार्यों की थर्ड पार्टी मॉनिटरिंग की जाएगी। इसके लिए निगम अधिकृत एजेंसियों से एक्सपर्ट की एक टीम को हायर करेंगे। जो शहर में होने वाले विकास कार्यों पर अपनी राय देने के साथ गुणवत्ता की भी जांच करेगी। उस टीम की रिपोर्ट के आधार पर ही ठेकेदारों को पेमेंट की जाएगी।
सुमेधा कटारिया, नगर निगम आयुक्त करनाल।