करनाल। जिला नागरिक अस्पताल में पिछले करीब एक सप्ताह से अधिक समय से थायराइड जांच (टीएसएच सहित) पूरी तरह बंद पड़ी है। जांच बंद होने के बावजूद मरीजों के नमूने लगातार लिए जा रहे हैं। मरीजों को न तो यह बताया जा रहा है कि मशीन खराब है और न ही यह जानकारी दी जा रही है कि रिपोर्ट कब मिलेगी। मरीज रिपोर्ट के लिए लैब और डॉक्टर के चक्कर काट रहे हैं।
अस्पताल में रोजाना 60-70 लोगों की थायराइड की जांच लिखी जाती है। सामान्य प्रक्रिया के अनुसार, मरीज सैंपल देकर घर लौट जाते हैं और बाद में रिपोर्ट दिखाने डॉक्टर के पास पहुंचते हैं। इन दिनों डॉक्टर के कंप्यूटर पर रिपोर्ट उपलब्ध ही नहीं हो रही। मरीज जब इसका कारण पूछते हैं तो डॉक्टर उन्हें लैब भेज देते हैं, जबकि लैब से उन्हें फिर डॉक्टर के पास भेज दिया जाता है।
मरीज रोहिणी, अक्षिता, युक्ति गुप्ता का कहना है कि जब अस्पताल प्रशासन और लैब स्टाफ को पहले से पता है कि मशीन खराब है और जांच नहीं हो पा रही, तो फिर मरीजों के नमूने क्यों लिए जा रहे हैं। यदि जांच संभव नहीं है तो मरीजों को उसी समय इसकी जानकारी देकर वैकल्पिक व्यवस्था या निजी लैब से जांच कराने की सलाह दी जा सकती है।
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निजी लैब में 350 से 700 रुपये तक खर्च
जिला नागरिक अस्पताल में थायराइड जांच निशुल्क है। शहर की निजी लैब में केवल टीएसएच जांच के लिए सामान्यतः 350 से 500 रुपये तक लिए जाते हैं, जबकि पूरा थायराइड प्रोफाइल 500 से 700 रुपये या उससे अधिक में किया जाता है। आर्थिक रूप से कमजोर मरीजों के लिए यह अतिरिक्त खर्च परेशानी बढ़ा रहा है।
सेंसर में है तकनीकी खराबी
जिला नागरिक अस्पताल के प्रवक्ता डॉ. दीपक गोयल ने बताया कि थायराइड जांच करने वाली मशीन के हीटिंग सेंसर में तकनीकी खराबी आ गई है। कंपनी के दिल्ली स्थित कार्यालय को सूचना दे दी गई है और तकनीशियन को बुलाया गया है। जल्द ही मशीन ठीक हो जाएगी।
रिपोर्ट नहीं मिली, तीन बार लगाए चक्कर
सेक्टर-13 निवासी राजेश ने बताया कि डॉक्टर ने थायराइड जांच लिखी थी। उन्होंने उसी दिन लैब में सैंपल दे दिया। दो दिन बाद डॉक्टर के पास पहुंचे तो कंप्यूटर में रिपोर्ट उपलब्ध नहीं थी। डॉक्टर ने लैब भेजा लेकिन वहां से कहा गया कि रिपोर्ट डॉक्टर के पास पहुंच जाएगी। इसके बाद भी रिपोर्ट नहीं आई। उन्हें तीन बार अस्पताल आना पड़ा।
किराया खर्च कर आए, खाली हाथ लौटे
नीलोखेड़ी निवासी सुनीता ने बताया कि वह गांव से बस में किराया खर्च कर जिला नागरिक अस्पताल पहुंची। डॉक्टर ने थायराइड जांच लिखी और लैब में सैंपल भी ले लिया गया। एक सप्ताह बाद रिपोर्ट लेने पहुंची तो पता चला कि जांच ही नहीं हुई। अब या तो दोबारा अस्पताल आना पड़ेगा या निजी लैब में पैसे देकर जांच करानी होगी।