एसी और ठंडे पानी की आदत बन रही फैरिंजाइटिस और साइनोसाइटिस होने की मुख्य वजह
संवाद न्यूज एजेंसी
करनाल। गर्मी बढ़ते ही गले से जुड़ी बीमारियों के मरीजों की संख्या में इजाफा हो रहा है। नागरिक अस्पताल में इन दिनों ओपीडी में हर रोज 80 से 90 लोग गले में सूजन, खराश, खांसी और सांस लेने में दिक्कत जैसी शिकायतों के साथ पहुंच रहे हैं। इसके अलावा, जुखाम के फ्लू ओपीडी में रोजाना 50 मरीज आ रहे हैं, जो फसल कटाई और धूल भरे मौसम में सांस नहीं ले पा रहे हैं। जिस कारण उन्हें नाक के बजाय मुंह से सांस लेनी पड़ रही है।
डॉ. जयवर्धन का कहना है कि मौजूदा गर्मी में आधे लोग दिनभर एसी में रहने के आदी हो गए हैं जबकि कुछ ऐसे लोग है, जो कोई व्यक्ति एसी से निकलकर सीधे गर्म धूप में आता है और फिर ठंडा पानी या आइसक्रीम का सेवन करता है, जिससे शरीर के तापमान का अचानक झटका लगता है। यही कारण है कि फैरिंजाइटिस (गले में खराश) और साइनोसाइटिस (साइनस) जैसे इंफेक्शन के मामले लगातार बढ़ रहे हैं। ओपीडी में इन मामलों में मरीजों की संख्या में लगभग 10 से 15 प्रतिशत की वृद्धि देखी जा रही है। ओपीडी में मरीज गला बैठने, निगलने में तकलीफ और तेज बुखार के साथ आ रहे हैं। उन्होंने बताया कि एसी या ठंडी जगह पर रहते शरीर एक खास तापमान पर अनुकूल हो जाता है। फिर अचानक बाहर 40 डिग्री सेल्सियस की गर्मी में निकलना और ठंडा पानी पीना गले की टिशूज पर असर डालता है। इससे इंफेक्शन होने लगता है।
बीमारी के लक्षण
-गले में लगातार खराश और दर्द
- निगलने में कठिनाई
- आवाज बैठना या भारी होना
- तेज बुखार के साथ सूजन
- सिरदर्द और नाक बंद रहना
- सांस लेने में तकलीफ
शरीर का तापमान संतुलित रखना जरूरी है। इसके लिए यह ध्यान रखना चाहिए अगर एसी से बाहर निकलना है तो उस समय शरीर को सामान्य वातावरण में ढालने के लिए 5-10 मिनट का अंतराल जरूर रखें। इसके अलावा, ठंडा पानी, आईसक्रीम या बर्फीले ड्रिंक्स से बचें और दिन में दो बार गुनगुने पानी से गरारे करें। सामान्य तापमान पर पर्याप्त पानी पीएं ताकि डिहाइड्रेशन से बचे रहें। साथ ही, धूल-धूप से बचाव के लिए मास्क पहनकर रखें।
- डॉ. जयवर्धन, ईएनटी विशेषज्ञ