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हादसों में तीन लोगों की मौत

Sun, 01 Dec 2013 10:45 PM IST
करनाल
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करनाल शहर में तीन जगह हुए हादसों में तीन लोगों की मौत होने का मामला सामने आया है। पहला हादसा रेलवे यार्ड के पास हुआ, जहां एक व्यक्ति ने मालगाड़ी के आगे कूदकर आत्महत्या कर ली।
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थाना जीआरपी ने मृतक के पुत्र के बयान पर कार्रवाई की है। शिव कॉलोनी के गुरु नानकपुरा का रहने वाले 50 वर्षीय प्रताप सिंह ने शनिवार रात 11 बजे यार्ड के पास अंबाला से आ रही ट्रेन के आगे छलांग लगा दी, जिससे उसकी मौके पर ही मौत हो गई।

जांच अधिकारी सुभाष चंद ने बताया कि शनिवार रात यार्ड के पास शव पड़ा होने की सूचना मिली थी। शव को कब्जे में लेने के बाद उसे पहचान के लिए मोर्चरी में रखवाया गया, जहां रविवार सुबह पहचान प्रताप सिंह के रूप में हुई है। पुलिस आत्महत्या के मामले की जांच में जुटी है।
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दूसरा हादसा हाईवे स्थित हवेली के समीप रविवार अलसुबह हुआ, जहां अज्ञात वाहन की चपेट में आने से व्यक्ति की मौत हो गई।

मृतक की अभी तक पहचान नहीं हो पाई है। सूचना मिलते ही सदर थाना पुलिस ने शव को कब्जे में लेने के बाद उसे पहचान के लिए मोर्चरी भिजवा दिया है। जांच अधिकारी एएसआई जितेंद्र कुमार ने बताया कि रविवार सुबह पांच बजे हवेली के समीप चंडीगढ़ रोड़ पर शव पड़ा होने की सूचना मिली थी।

मौके पर पहुंचकर शव को कब्जे में लेने के बाद उसे पहचान के लिए कल्पना चावला राजकीय मेडिकल कॉलेज और अस्पताल की मोर्चरी में भिजवा दिया है। जांच अधिकारी ने बताया कि प्राथमिक जांच में पता चला है कि मृतक दिमागी रूप से बीमार था। मृतक की आयु करीब 45 वर्ष और कद पांच फूट छह इंच है। मृतक चेकदार कमीज व नीले रंग की जैकेट पहने हुए था।

तीसरा हादसा काछवा के समीप हुआ, जहां अज्ञात कार की चपेट में आने से बाइक सवार वृद्ध की मौत हो गई। सदर थाना पुलिस ने मृतक के पुत्र राजकुमार की शिकायत पर अज्ञात कार चालक के खिलाफ मामला दर्ज किया गया है। काछवा का रहने वाला 65 वर्षीय सुरजीत सिंह शनिवार देर शाम बाइक से गांव जा रहा था।

गांव के समीप पहुंचने पर तेज रफ्तार कार ने चपेट में ले लिया। इस कारण सुरजीत सिंह गंभीर रूप से घायल हो गया। राहगीराें की सहायता से उन्हें उपचार के लिए अस्पताल पहुंचाया गया, जहां डॉक्टर ने उसे मृत घोषित कर दिया। घटना को अंजाम देने के बाद कार चालक वाहन सहित मौके से फरार हो गया। सदर थाना पुलिस ने रविवार को कार चालक के खिलाफ मामला दर्ज किया है।

चोरों ने लाखों रुपये की केबल पर किया हाथ साफ
असंध के गांव मूंड में अज्ञात चोर शनिवार रात को खेतों में लगे सबमर्सिबल ट्यूबवेलों की लाखों रुपये की तार चुराकर फुर्र हो गए। सूचना मिलने पर पुलिस मौके पर पहुंची और चोरों का सुराग लगाने में जुट गई।

पीड़ित किसान अशोक कुमार, मांगेराम, चंद्रहास, रामस्वरूप, सूबे सिंह, जोगीराम, महेंद्र सिंह ने बताया कि रविवार सुबह जब वे खेतों में गए तो देखकर होश उड़ गए कि उनके ट्यूबवेलों पर लगी लाखों की कीमती तार नदारद है।

पुलिस के खिलाफ गरजे सामाजिक संगठन
करनाल शहर की कई सामाजिक संस्थाआें के पदाधिकारियों और कार्यकर्ताओं ने प्रदेश में बढ़ती पुलिस बर्बरता की घटनाआें और कारखानों में श्रम कानूनों की पालना नहीं किए के विरोध में रविवार को शहरभर में प्रदर्शन किया।

प्रदर्शन करने वालों में शहर की प्रमुख सामाजिक संस्था विधिक एवं सामाजिक सुधाराें के लिए आंदोलनरत फाइट फॉर जस्टिस क्लब ऑफ इंडिया, लिबर्टी वर्कर्स संयुक्त संघर्ष समिति एवं द ग्रेट अभिमन्यु क्लब के कार्यकर्ता शामिल रहे।

प्रदर्शनकारियों ने न्यायपालिका और मानवाधिकार आयोग से फरियाद करते कहा कि पुलिस बर्बरता के खिलाफ नागरिकों को संरक्षण प्रदान करने के लिए दोनों संस्थाएं आगे आएं। फाइट फॉर जस्टिस क्लब ऑफ इंडिया के अध्यक्ष एडवोकेट हरीश आर्य ने कहा कि पुलिस की ओर से सरेआम नागरिकों के अधिकारों का हनन किया जा रहा है। कानून सबके लिए एक समान है।

वास्तविकता यह है कि अमीर और गरीब के लिए कानून की परिभाषाएं अलग-अलग हैं। लोकतंत्र की हत्या हो रही है लेकिन लोकतांत्रिक व्यवस्थाएं हाथ पर हाथ धरे बैठी हैं। कारखानों में श्रम कानूनों की पालना नहीं हो रही है।

लोगों की, लोगों के लिए, लोगों द्वारा बनाई गई लोकतंत्र की परिभाषा अब अमीरों की, अमीरों के लिए, पुलिस द्वारा बनाई गई दमनकारी व्यवस्था में तबदील हो चुकी है। गरीब फरियादी की कहीं कोई सुनवाई नहीं हो रही है। सुरक्षा व इंसाफ के लिए लोग दर-दर की ठोकरें खा रहे हैं।

जेलों में बंद लोगों में 50 प्रतिशत लोग बेकसूर हैं। पुलिस बर्बरता की सारी सीमाएं लांघ चुकी है। नागरिकाें से बदतमीजी से पेश आना, झूठे मुकद्दमे दर्ज करना व सच्ची शिकायत दर्ज नहीं करना, गैरकानूनी वसूली करना, तफतीश के नाम पर नागरिक अधिकारों का हनन करना, अवैध हिरासत में रखना, गिरफ्तारी की सूचना वारसान को न देना, धाराओं का गलत प्रयोग करना, अपराधियों के साथ सांठगांठ रखना, थर्ड डिग्री टॉर्चर करना और अपराध के आंकड़े कम दिखाने के नाम पर एफआईआर दर्ज नहीं करना पुलिस दिनचर्या का एक चरित्र बन चुका है।

जन प्रतिनिधियों ने अपने निजी हित साधने के लिए बर्बर पुलिस को हनन करने के लिए खुला छोड़ा हुआ है। आर्य ने कहा कि न्यायालयों के काम के बोझ तले दबे होने का कारण तो समझ आता है लेकिन मानवाधिकार आयोग क्यूं लकवाग्रस्त है, यह समझ से परे है।

प्रदर्शन करने वालों में श्रमिक नेता जोगेंद्र भारती, सुनील कुमार, लक्ष्मी नारायण, नरेंद्र कुमार, मंगल दास, पदम कुमार, सुभाष चंद्र, देवदत्त, विजयमल, ओमपाल, राजकुमार, चंद्रप्रकाश, शीला रानी, सुधीर कुमार, अशोक कुमार, जिले सिंह, सतिंद्र सिंह सोनी, संजीव शर्मा, नरेंद्र कलेर, हरमीत सिंह, संजीव नरवाल, लखन सामरा, हिमांशु खरबंदा शामिल थे।
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