माई सिटी रिपोर्टर
करनाल। शहर सहित जिले में कहीं हल्की तो कहीं झमाझम बारिश हुई। इससे अनाज मंडियों में खुले में पड़ा हजारों क्विंटल धान भी भीग गया। बारिश से अनाज मंडी की सड़कों पर जलभराव जैसी स्थिति उत्पन्न हो गई। इससे किसानों और अन्य लोगों को परेशानी हुई । मंडियों में सफाई नहीं होने के कारण कूड़ा भी पानी में तैरता नजर आया।
अनाज मंडियों में पिछले एक महीने से अधिक समय से 1509 धान की खरीद हो रही है, जिसके कारण मंडियों में कूड़ा बहुत पड़ा है। करनाल मंडी में भी मंडी शेड व सड़कों पर सफाई नहीं होने से गंदगी का आलम है। शुक्रवार को सुबह से तेज धूप थी, दोपहर बाद बूंदाबांदी हुई लेकिन शाम को अचानक बारिश होने के कारण करनाल मंडी में मुख्य मार्ग पर जलभराव जैसी स्थिति उत्पन्न हो गई। परिसर में खुले रखा हजारों क्विंटल धान भीग गया।
ठीक मिला धान का भाव
उत्तर प्रदेश से धान लेकर करनाल की मंडी में आए किसान पवन ने बताया कि धान का रेट ठीक मिल रहा है वहां अपनी 100 क्विंटल धान लेकर करनाल नई अनाज मंडी में आए थे और उनको धान का रेट जो सरकार द्वारा निर्धारित किया गया है उसी रेट पर धान की खरीद हो रही है।
धान बेचने में हो रही दिक्कत
उत्तर प्रदेश से धान लेकर आए किसान इकबाल ने बताया कि बेमौसम बारिश के कारण इस बार धान अच्छी नहीं हुई और धान को बेचने के लिए लेकर आए तो अनाज मंडी में पंखा लगा कर धान को सुखाना पड़ रहा है जिस कारण धान को बेचने में दिक्कत हो रहीं है और जो रेट मिलना चाहिए वो नहीं मिल रहा है।
मंडी में धान का सही भाव नहीं मिल रहा
उत्तर प्रदेश से धान लेकर आए किसान सनी ने बताया कि इस बार धान का रेट सही नहीं मिल रहा। सरकार द्वारा 2500 रेट रखा गया है लेकिन किसानों को 2100 प्रति क्विंटल मिल रहा है । जो कि बहुत कम है और धान उगाने में जितना खर्च आया है वो भी पूरा नहीं हो पा रहा है।
लागत भी निकलना मुश्किल हो रहा
उत्तर प्रदेश से धान लेकर आए किसान पदम सिंह ने बताया कि धान का जो रेट सरकार द्वारा दिया जा रहा उसे कम रेट मंडियों में दिया जा रहा है। दवाइयों के दाम भी अधिक हो गए है, जिस कारण जितना खर्च फसल लगाने में लगता है उतना धान को बेचते वक्त नहीं मिलता।
पहले दिन 55 एमटी खरीदा धान
करनाल। हरियाणा सरकार ने एक बार फिर अपने आदेश को बदलते हुए शुक्रवार से धान की सरकारी खरीद शुरू कर दी। परिणाम ये रहा कि न किसान तैयार थे और न ही एजेंसियां। फिर भी दो मंडियों में 55 मीट्रिक टन पीआर धान की खरीद की गई। वहीं, करनाल राइस मिलर एसोसिएशन ने अपनी मांगें पूरी होने तक सीएमआर के लिए पंजीकरण कराने और धान खरीदने से साफ इनकार कर दिया। वहीं दूसरी ओर करनाल सहित कई अनाज मंडियों में खुले में पड़ा हजारों क्विंटल धान भीग गया, जिससे उसमें नुकसान की आशंका उत्पन्न हो गई। हरियाणा सरकार ने पहले तो 23 सितंबर से सरकारी धान शुरू करने का आदेश जारी किया था लेकिन बाद में मुख्य सचिव के आदेश पर खरीद तिथि को आगे बढ़ाकर एक अक्तूबर कर दिया गया।
वहीं मंडियों में पीआर धान की आवक लगातार बढ़ती जा रही है, किसानों को औने-पौने दामों पर धान बेचना पड़ा तो विपक्षियों ने इसे चुनावी मुद्दा बनाकर सरकार के खिलाफ इस्तेमाल करना शुरू कर दिया। आखिरकार सरकार को बैकफुट पर आना पड़ा और धान खरीद को 27 सितंबर से शुरू करने का आदेश देना पड़ा। आदेश मिलते ही खरीद एजेंसियां और मंडी सचिव आदि सक्रिय हुए। करनाल सहित कई अनाज मंडियों में खरीद एजेंसियां ही नहीं पहुंच पाई लेकिन खाद्य आपूर्ति एवं उपभोक्ता मामले नियंत्रक अनिल कालड़ा ने बताया कि शुक्रवार को पहले दिन जिले की तरावड़ी मंडी में खाद्य विभाग ने 16 और इंद्री मंडी में हरियाणा वेयर हाउस ने 39 मीट्रिक टन सहित कुल 55 मीट्रिक टन धान खरीदा गया है। ब्यूरो