प्रदेश सरकार की ओर से शहरी क्षेत्रों में स्थानीय निकाय के 30 से 40 वर्ष पुराने किराएदारों को उस प्रॉपर्टी का मालिकाना हक देने की घोषणा से जिले के हजारों किराएदारों की बाछें खिल उठी हैं, जो उस प्रॉपर्टी के मालिकाना हक को लेकर सरकार व कोर्ट का दरवाजा खटखटा रहे थे। जिले में इस समय स्थानीय निकाय की करीब 15 सौ प्रॉपर्टी हैं, जिनसे निकाय को प्रतिमाह करीब 20 लाख रुपये राजस्व मिल रहा है, जो मार्केट रेट से बेहद कम है। इसलिए सरकार द्वारा अब प्रॉपर्टी के किराएदारों को ही मालिकाना हक देने का निर्णय लिया है। इससे जहां लोगों को मालिकाना हक मिलेगा, वहीं निकाय को करोड़ों रुपये का राजस्व प्राप्त होगा। बता दें कि करनाल शहर के साथ-साथ अन्य कस्बों में कलेक्टर रेट पांच हजार से लेकर एक लाख रुपये प्रति गज के है। ऐसे में अंदाजा है कि दुकानें बेचने से निगम और नगरपालिकाओं का खजाना भर जाएगा।
बता दें कि प्रदेश सरकार ने स्थानीय निकाय के उन किराएदारों के पक्ष में यह फैसला सुनाया है, जो पिछले 30 से 40 वर्षों से निगम की प्रॉपर्टी को लीज या रेंट पर लेकर उसका नियमित समय पर किराए का भुगतान करते रहे हैं। स्थानीय निकाय द्वारा बरसों पुराने इन किराएदारों को मार्केट रेट की बजाए कलेक्टर रेट पर प्रॉपर्टीज का मालिकाना हक दिया जाएगा। इससे पहले निकाय द्वारा शहरी क्षेत्रों में एक सर्वे कराया जाएगा, जिसमें प्रॉपर्टीज के हस्तांतरण को लेकर लागू होने वाली शर्तों का अवलोकन किया जाएगा। सर्वे रिपोर्ट आने के बाद ही स्थानीय निकाय द्वारा प्रॉपर्टी के मालिकाना हक का स्थानांतरण किया जाएगा।
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जिले में हैं स्थानीय निकास की 15 सौ प्रॉपर्टी
जिले के शहरी क्षेत्रों में स्थानीय निकाय की 15 सौ से भी अधिक प्रॉपर्टी हैं, जो पिछले करीब 30 से 40 वर्षों से किराए पर चल रही हैं। स्थानीय निकाय द्वारा अभी तक उस प्रॉपर्टी के रेंट पॉलिसी में कोई बदलाव नहीं किया है। इससे निकाय को इन प्रॉपर्टीज से नामात्र किराया ही मिल रहा है। जिलेभर में स्थानीय निकाय इन 15 सौ प्रॉपर्टीज से महज 20 लाख रुपये मासिक राजस्व ही प्राप्त होता है। वहीं, दुकानदार हरीश कुमार, कर्मचंद आदि का कहना है कि उन्हें वर्षों बीत गए लड़ाई लड़ते हुए। इस फैसलों से यकीनन उन्हें राहत मिलेगी और वे भी किरायेदार से मालिक बन सकेंगे।
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जिले में स्थानीय निकाय की कहां पर हैं कितनी प्रॉपर्टी
निगम/नपा प्रॉपर्टी राजस्व
निगम करनाल 642 7.50 लाख रुपये मासिक
इंद्री 230 3.00 लाख रुपये मासिक
असंध 84 1.75 लाख रुपये मासिक
घरौंडा 192 3.25 लाख रुपये मासिक
तरावड़ी 62 1.25 लाख रुपये मासिक
निसिंग 30 80 हजार रुपये मासिक
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जिले में कहां पर कितना है कलेक्टर रेट
निगम/नपा अधिक तम/प्रति वर्गगज न्यूनतम/ प्रति वर्गगज
करनाल 1 लाख रुपये 17 हजार रुपये
इंद्री 30 हजार रुपये 25 सौ रुपये
घरौंडा 39 हजार रुपये 6 हजार रुपये
निसिंग 26 हजार रुपये 38 सौ रुपये
नीलोखेड़ी 42 हजार रुपये 35 सौ रुपये
निगदू 27 हजार रुपये 4 हजार रुपये
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शहर में नगर निगम की कहां पर है प्रापर्टीज
शहर में विभिन्न स्थानों पर नगर निगम की 642 प्रॉपर्टीज है, जिनसे निगम को प्रतिमाह साढ़े सात लाख रुपये का राजस्व प्राप्त होता है। जो मौजूदा मार्केट बेहद कम है। यदि निकाय की प्रॉपर्टीज की बात करें तो, शहर के सबसे व्यस्ततम बाजार नेहरू प्लेस, कमेटी चौक, कर्णताल, कर्ण पार्क, अशोका सिनेमा, रणधीर सिनेमा, मिनार रोड, रामनगर, प्रेमनगर, काछवा रोड, कैथल रोड, रेलवे स्टेशन, बस स्टैंड के आसपास है। लेकिन निकाय द्वारा रेंट पॉलिसी 1972 के बाद कोई भी सुधार न करने से आज तक वहीं 40 पुरानी रेंट दरें चल रही हैं। जो मौजूदा मार्केट रेट से बेहद कम हैं। लेकिन सरकार ने अब कलेक्टर रेट पर निकाय के 30 से 40 वर्ष पुराने किराएदारों को उन प्रॉपर्टीज का मालिकाना हक देने का फैसला लिया है। इससे निगम के राजस्व में भी करोड़ों रुपये की बढ़ोतरी होगी। यही नहीं प्रॉपर्टीज का मालिकाना हक देने के बाद भी निगम हाउस रेंट के रूप में हजारों रुपये की वसूली करता रहेगा।
वर्जन
अभी सरकार द्वारा घोषणा की गई है, लेकिन निगम के पास अभी तक इस संबंध में कोई निर्देश नहीं मिले हैं। निगम को सरकार से जो भी आदेश प्राप्त होंगे, उसी के अनुसार आगे की कार्रवाई की जाएगी। यकीनन इस फैसले से निगम के केस भी समाप्त होंगे और दूसरा नगर पालिकाओं और निगम को करोड़ों का राजस्व प्राप्त होगा।
सुमेधा कटारिया, नगर निगम आयुक्त करनाल।