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करनाल: बच्चों में एल्बेंडाजोल के दुष्प्रभावों पर होगा सर्वे

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अनुज शर्मा
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करनाल। बच्चों को खिलाई जाने वाली एल्बेंडाजोल टेबलेट के दुष्प्रभावों का अब मॉडल पता लगाएगा। इसके लिए कल्पना चावला मेडिकल कॉलेज के फार्माकोलोजी विभाग के डॉ. तीर्थांकर देब ने एक अभिनव सक्त्रिस्य निगरानी मॉडल तैयार किया है, जो नेशनल डीवार्मिंग डे के अंतर्गत एक से 19 वर्ष तक के बच्चों को खिलाई गई एल्बेंडाजोल टेबलेट का उनके शरीर में कोई दुष्प्रभाव तो नहीं आया, उसके बारे में जानकारी एकत्रित करेगा। जिसका नाम एक्टिव सर्विसेंस व असिस्टेड रिपोर्टिंग मॉडल रखा गया है।
कल्पना चावला मेडिकल कॉलेज के औषधि दुष्प्रभाव निगरानी केंद्र के संयोजक डॉ. तीर्थांकर देब ने बताया कि प्रतिवर्ष की भांति इस वर्ष भी देश के साथ-साथ हरियाणा में भी नेशनल डीवार्मिंग डे के अंतर्गत एक से 19 वर्ष के बच्चों को एल्बेंडाजोल की एक डोज दी गई है।
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उन्होंने बताया कि आमतौर पर देशभर में दवाइयों के दुष्प्रभाव के लिए केवल पैसिव सर्विलेंस की जाती है यानी कहीं से जानकारी आई तो दर्ज कर ली, लेकिन इस अभिनव निगरानी मॉडल के अंतर्गत प्रत्येक केंद्र के साथ संपर्क बनाते हुए एक्टिव सर्विलेंस की जा रही हैं। इसे सफल बनाने के लिए जिला स्वास्थ्य व शिक्षा विभाग के साथ समन्वय बनाते हुए जिलेभर के 779 सरकारी स्कूलों में पढ़ने वाले डेढ़ लाख से अधिक बच्चों को सर्वे में शामिल किया गया है। उन्होंने बताया कि इस मॉडल को कार्यान्वित करने में मेडिकल कॉलेज में पीजी की पढ़ाई कर रहे छात्र डॉ. बबीता, डॉ. मयूर और केंद्र में कार्यरत डॉ. रितु ने सहयोग दिया है। जहां एक तरफ स्कूलों में जाकर प्रशिक्षण दिया जा रहा है, वहीं दूसरी और अगर कहीं से जानकारी प्राप्त हुई तो वहां जाकर फॉर्म भरने में असिस्टेड रिपोर्टिंग के लिए सहयोग किया जा रहा है। संवाद
स्कूलों को सौंपे फॉर्म
फार्माकोलॉजी विभाग के अध्यक्ष डॉ. जयंत कुमार कैरी ने बताया कि डॉ. देब द्वारा तैयार इस नए निगरानी पद्धति में प्रत्येक स्कूल के पास ये फॉर्म दिया गया है जो कक्षा की इंचार्ज के पास रहेगा। फॉर्म में विद्यार्थी का नाम, लिंग, आयु, एल्बेंडाजोल की मात्रा, औषधि दुष्प्रभाव का विवरण, परिणाम, औषधि का बैच क्त्रस्मांक व निर्माता का नाम, औषधि निर्माण व समाप्ति तिथि दी गई हैं। स्वास्थ्य विभाग और महिला एवं बाल विकास विभाग ने स्कूली बच्चों को दवाई खिलाई है। ऐसे में स्कूल में जिन बच्चों पर दवाई खाने के बाद कुछ दुष्प्रभाव दिखेगा तो कक्षा इंचार्ज उक्त सारी जानकारी भरकर ई-मेल, व्हाट्सएप या ऑफलाइन माध्यम से मेडिकल कॉलेज में स्थित निगरानी केंद्र में जमा कराएंगे।
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प्रतिकूल प्रभावों का लगेगा पता
कल्पना चावला मेडिकल कॉलेज के निदेशक डॉक्टर जगदीश दुरेजा ने बताया कि यह मॉडल सार्वजनिक विश्वास और भागीदारी को बढ़ाने के लिए बड़े पैमाने पर दिए जाने वाले किसी भी दवाई के बाद संभावित प्रतिकूल दवा प्रतिक्त्रिस्याओं की निगरानी के लिए एक मजबूत तंत्र होगा। इस मॉडल से एल्बेंडाजोल टेबलेट के किसी भी प्रतिकूल प्रभाव की बेहतर रिपोर्टिंग हो सकेगी।
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