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Karnal News: मानसून की तैयारियों का था दावा, खुले पड़े नाले बने खतरा

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मानसून की तैयारियों का था दावा, खुले पड़े नाले बने खतरा - फोटो : मानसून की तैयारियों का था दावा, खुले पड़े नाले बने खतरा
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माई सिटी रिपोर्टर
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करनाल। नगर निगम की ओर से की गई मानसून की तैयारियों की असलियत शहर के खुले पड़े नाले उजागर कर रहे हैं। बारिश शुरू होने से पहले जहां निगम कुछ इलाकों में आधुनिक बकेट मशीन से सफाई कराने का दावा कर रहा है, वहीं शहर के प्रमुख क्षेत्रों में खुले नाले निगम की लापरवाही उजागर कर रहे हैं।
रामनगर, प्रेमनगर, कल्पना चावला चौक, निर्मल कुटिया रोड और सेक्टर-चार जैसे व्यस्त इलाकों में आज भी कई बड़े नाले खुले पड़े हैं। इन नालों के ऊपर स्लैब तक नहीं हैं, जो बारिश के मौसम में हादसों की बड़ी वजह बन सकते हैं।
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पैदल चलने वाले राहगीर, स्कूली बच्चे और दोपहिया वाहन चालकों के लिए ये खुले नाले जानलेवा साबित हो सकते हैं। शहर में करीब 58 किलोमीटर लंबी स्ट्रॉम वाटर पाइपलाइन बिछी है। इनमें से प्रमुख निकासी लाइन मुगल कैनाल ड्रेन की करीब पांच किलोमीटर सफाई कराई जा चुकी है।
इस पर नगर निगम करीब 95 लाख रुपये का बजट खर्च कर चुका है। हालांकि बाकी इलाकों की स्थिति अब भी जस की तस है। नगर निगम फिलहाल बकेट मशीन की तकनीक से उन नालों की सफाई कर रहा हैं जो ढके हैं। इस तकनीक में स्लैब हटाने की जरूरत नहीं होती और मशीन के माध्यम से अंदर से ही नालों की सफाई कर दी जाती है। दूसरी ओर जो नाले अभी तक खुले हैं उन्हें ढकने की दिशा में  कार्रवाई नहीं हो पा रही।
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सफाई के बड़े-बड़े दावे ः बिना स्लैब के खुले नालों से निकलने वाली बदबू और गंदगी से आसपास के लोगों का जीना मुश्किल हो गया है। स्थानीय लोगों का कहना है कि हर बार मानसून से पहले निगम सफाई के बड़े-बड़े दावे करता है लेकिन जमीनी हकीकत कुछ और होती है।

मानसून की तैयारियों का था दावा, खुले पड़े नाले बने खतरा- फोटो : मानसून की तैयारियों का था दावा, खुले पड़े नाले बने खतरा

मानसून की तैयारियों का था दावा, खुले पड़े नाले बने खतरा- फोटो : मानसून की तैयारियों का था दावा, खुले पड़े नाले बने खतरा

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