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गांव को खुले में शौचमुक्त करने की ठानी

Wed, 13 Jul 2016 11:57 PM IST
ब्यूरो/करनाल,अमर उजाला
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toilet - फोटो : अमर उजाला
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करनाल के धौलगढ़ गांव की आंगनबाड़ी कार्यकर्ता गीता देवी खुले में शौचमुक्त अभियान के तहत अपने-अपने क्षेत्र के लोगों को ना केवल समझाने में जुटी हैं बल्कि दिन में क्षेत्र में इस बात का पहरा भी दे रही हैं कि गांव का कोई भी व्यक्ति अपने गांव की आबोहवा खराब ना करे।
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गीता दिन निकलने से पहले ही अपने गांव की फिरनी में शौच के लिए बाहर जाने वाली महिलाओं को समझाती नजर आती है और अपनी पारिवारिक जिम्मेदारी निभाने के बाद फिर इसी मिशन पर अपनी सहयोगी महिलाओं के साथ निकल जाती है।
वह लोगों को बताती है कि खुले में शौच किसी अभिशाप से कम नहीं। बाहर शौच जाने से बीमारियां फैलती हैं, गंदगी फैलती है। पूछने पर उसने बताया कि इस बात का थोड़ा बहुत हमें पहले भी पता था लेकिन प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और मुख्यमंत्री मनोहर लाल ने जब लोगों के जेहन में स्वच्छता और बेटी बचाओ-बेटी पढ़ाओ अभियान की अलख जगाई तो हमें भी समझ में आया कि अपने गांव को खुले में शौचमुक्त करना है। अब इस दिशा में निरंतर आगे बढ़ रहे हैं और प्रयास रहेगा कि अपने गांव को लोगों के सहयोग से सबसे पहले खुले में शौचमुक्त करवाऊं।
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गांव की बुजुर्ग महिला सुखो देवी ने इस प्रयास की सराहना की। उन्होंने कहा कि बेटी यो काम तो पहल्यां-ए करण का था --पर इबै बी कोई देर नहीं होई। गांव मैं बुजुर्ग कहया करैं के जद जागो तबै सबेरा। बुजुर्ग महिला की इस बात को सुनकर हमारा हौसला पूरे यौवन पर है। अब न केवल डीसी की ओर से 31 दिसंबर तक खुले में शौचमुक्त करने के लक्ष्य को पूरा करने मे सहयोग देंगे बल्कि इसी प्रकार के अन्य किसी सामाजिक आंदोलन में भी बढ़चढ़ कर हिस्सा लेंगे। गीता की सहयोगी बुजुर्ग महिला मुन्नी देवी और पाती ने कहा कि हमने भी अपने घरों में शौचालय बनवा लिया है।
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