करनाल। रात के करीब डेढ़ बजे। कल्पना चावला राजकीय मेडिकल कॉलेज की इमरजेंसी के बाहर मरीजों और उनके परिजन की भीड़ लगी है। कोई स्ट्रेचर ढूंढ रहा था, कोई डॉक्टर को बुलाने के लिए इधर-उधर भाग रहा है। इसी बीच गांव उचाना से आए 62 वर्षीय राजेंद्र सिंह को तेज सांस फूलने और ऑक्सीजन लेवल गिरने की शिकायत के बाद इमरजेंसी में लाया गया। जूनियर डॉक्टर मरीज को देखने के लिए आते हैं। काफी देर तक जब कोई सीनियर डॉक्टर नहीं आता है परिजन रोष जताने लगते हैं। कुछ देर बाद उन्हें जवाब मिला वेंटिलेटर खाली नही हैं, मरीज को कहीं और ले जाइए।
यह सिर्फ एक मरीज की कहानी नहीं है। यहां रात के समय इमरजेंसी में सीनियर रेजीडेंट डॉक्टर मौजूद नहीं रहते और पूरी व्यवस्था जूनियर डॉक्टरों के भरोसे चल रही है। इसका सीधा असर मरीजों के इलाज पर पड़ रहा है। कई मरीजों को मामूली स्थिति में भी रेफर किया जा रहा है।
अशोक, राजू और सत्यवान भी अपने मरीज को लेकर पहुंचे। उन्होंने बताया कि मधुमेह और उल्टी-दस्त की शिकायत पर डॉक्टरों ने पहले कहा कि मरीज की हालत गंभीर हो सकती है। बाद में सीनियर डॉक्टर उपलब्ध न होने और बेड की कमी का हवाला देकर रेफर करने की बात कही। मेडिकल कॉलेज की इमरजेंसी में लगे बेड स्टेटस बोर्ड पर भी सही स्थिति अपडेट नहीं थी। परिजन बार-बार पूछते रहे कि कौन सा बेड खाली है लेकिन किसी के पास स्पष्ट जवाब नहीं था।
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ओआरएस के लिए बाहर मेडिकल स्टोर भेजे जा रहे मरीज
भीषण गर्मी और डिहाइड्रेशन के मामलों के बीच इमरजेंसी में ओआरएस जैसी बुनियादी सुविधा को लेकर भी सवाल उठे हैं। सदर बाजार क्षेत्र से आए बबलू ने बताया कि उल्टी-दस्त होने के उन्होंने अपनी पत्नी को उल्टी-दस्त होने के कारण रात में अस्पताल लाया गया था। डॉक्टर ने पर्ची पर ओआरएस लिख दिया और बाहर से लाने को कहा। यदि ओआरएस भी बाहर से खरीदना पड़े तो फिर गरीब कहां जाएं।
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दो वेंटिलेटर और पूरी इमरजेंसी उन्हीं के भरोसे
मेडिकल कॉलेज की इमरजेंसी में फिलहाल केवल दो वेंटिलेटर के सहारे गंभीर मरीजों का इलाज चल रहा है। वेंटिलेटर खाली नहीं होने पर मरीजों को तुरंत रेफर कर दिया जाता है। आरोप है कि कई बार मरीज को प्राथमिक उपचार देकर ही दूसरे अस्पताल भेजने की तैयारी शुरू कर दी जाती है।
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निदेशक बोले- गलत मिला तो होगी कार्रवाई
मामले पर मेडिकल कॉलेज के निदेशक डॉ. एमके गर्ग ने कहा कि यदि सीनियर डॉक्टरों की मौजूदगी के बिना जूनियर डॉक्टर मरीजों को रेफर कर रहे हैं तो यह गलत है और इसकी जांच कर कार्रवाई की जाएगी। इमरजेंसी में ओआरएस उपलब्ध हैं और मरीजों को दिए जाने चाहिए। यदि वेंटिलेटर खाली नहीं हैं तो दूसरे विभागों से व्यवस्था करनी चाहिए, मरीजों को सीधे बाहर भेजना उचित नहीं है। सीनियर रेजीडेंट डॉक्टरों की ड्यूटी सुनिश्चित की जाएगी। यदि कोई ड्यूटी से अनुपस्थित पाया गया तो कारण बताओ नोटिस जारी कर कार्रवाई की जाएगी।
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तीमारदारों की पीड़ा
मैं अपनी पत्नी को इलाज के लिए लेकर आया था। डॉक्टरों के पास कई तरह की पर्ची रखीं थीं उनमें से एक पर्ची पर कुछ लिख कर दिया और मुझे कहा कि सामने दुकान से ले आओ। मैं गया और वहां से मुझे ओआरएस दे दिया गया। - बबलू सिंह, तीमारदार
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सांस की दिक्कत पर पिता को मेडिकल कॉलेज के आपातकालीन विभाग में लाया था। डॉक्टर ने न तो किसी सीनियर डॉक्टर से सलाह ली और न ही इलाज दिया। कह दिया कि हमारे पास वेंटिलेटर नहीं हैं आप इन्हें कहीं और ले जाओ। - विजय पाल, तीमारदार