माई सिटी रिपोर्टर
करनाल। नेशनल हाईवे-44 पर बने अंडरपास यूं तो छोटे वाहनों को दूसरी लेन में जाने का रास्ता देने के लिए हैं, लेकिन ये सुविधा भी हादसों का कारण बन रही है। क्योंकि यहां पर न तो लाइट लगी है और न ही सड़क की हालत ठीक है। अंदर से बाहर आते दोपहिया वाहन का यदि थोड़ा भी संतुलन बिगड़ा तो वाहन सीधा नाले में गिर सकता है। कई बार इस तरह के हादसे हो भी चुके हैं। इसके बाद भी किसी ने सुध नहीं ली।
अमर उजाला की टीम ने मंगलवार को हालात की पड़ताल की। बलड़ी बाईपास से लेकर मधुबन तक बने आठ अंडरपासों में कोई भी ऐसा नहीं मिला, जो पूरी तरह से ठीक हो। कहीं स्ट्रीट लाइट खराब थी तो कहीं सड़क। जहां यह दोनों ठीक मिले, वहां इसके बाहर बने नाले की स्लैब क्षतिग्रस्त थी। चालक की थोड़ी सी लापरवाही भी हादसे का कारण बन सकती है।
सेक्टर-9 अटल पार्क कट के पास बने अंडरपास से तो चारपहिया वाहन भी गुजरते थे, यहां अब बीच में स्टॉपर लगा दिए गए हैं, ऐसे में दोपहिया वाहन ही गुजरते हैं। कई बार तेज रफ्तार के कारण अंडरपास से बाहर निकलते वाहन यहां से गुजरते वाहनों से टकराए, जिनके कारण हादसा हुआ। इसके अलावा नमस्ते चौक के पास के अंडरपास से भारी वाहन भी गुजरते हैं। जिनके कारण छोटे वाहन चालकों को निकलने में परेशानी होती है।
रोशनी की व्यवस्था जरूरी
स्थानीय निवासी प्रीतम, अशोक और लक्ष्य का कहना है कि हाईवे पर अंडरपास में या उसके बाहर रोशनी होना जरूरी है। ताकि बाहर से अंदर की स्थिति पता चल सके। कई बार इन अंडरपास में नशेड़ी व आपराधिक किस्म के युवा बैठे होते हैं जो वारदात को भी अंजाम देते हैं। जहां पर रोशनी नहीं है, उन अंडरपास में अधिक खतरा है। यहां से रात में किसी दोपहिया वाहन चालक का गुजरना सुरक्षित नहीं है।
अंडरपास के पास जो नाले टूटे हुए हैं, इनकी मरम्मत का कार्य चल रहा है। शहर में जहां दिक्कत है, उन्हें प्राथमिकता पर दुरुस्त कराएंगे। यहां की स्ट्रीट लाइटों को भी ठीक कराया जा रहा है। -भानू प्रताप, सेक्शन इंजीनियर, एनएचएआई
पुलिस की लगातार हाईवे पर गश्त रहती है। अंडरपास भी चेक कर लिए जाएंगे। यहां यदि कोई नशेड़ी या आपराधिक किस्म का व्यक्ति मिला तो उस पर सख्त कार्रवाई होगी। हमारी टीमें सतर्क हैं। - गंगाराम पूनिया, एसपी करनाल