संवाद न्यूज एजेंसी
करनाल। जिले से मात्र 10 किलोमीटर दूर घोघड़ीपुर गांव के खेल मैदान में सुविधाओं का अभाव है। मैदान की बदहाली के चलते स्थानीय खिलाड़ी नियमित अभ्यास नहीं कर पा रहे। मैदान में ट्रैक पर लंबी-लंबी घास उगी है। गांव में बड़ी संख्या में युवा सेना व पुलिस भर्ती की तैयारी करते हैं। उन्हें दौड़ के लिए ट्रैक की आवश्यकता है। स्टेडियम का ट्रैक दौड़ने के लायक ही नहीं है। गांव से निकल रही नहर की पगडंडी पर दौड़ का अभ्यास किया जाता है।
गांव के 85 वर्षीय मास्टर एथलीट धर्म सिंह 400 मीटर दौड़ में कई बार स्वर्ण पदक जीत चुके हैं। सुविधाओं के अभाव में उन्हें भी आवर्धन नहर की पगडंडी पर अभ्यास करना पड़ता है। खेल परिसर के भवन में खिड़की-दरवाजे व रोशनदान टूटे पड़े हैं। मैदान उबड़-खाबड़ है। लंबी घास उगी हुई है। शौचालय बदहाल हैं। जिम है, ट्रेनर नहीं
खिलाड़ियों का कहना है कि पंचायत की ओर से जिम का सामान तो उपलब्ध कराया गया है, लेकिन अभ्यास के लिए कोई प्रशिक्षक नहीं है। बिना ट्रेनर वजन उठाना खिलाड़ियों के लिए जोखिमभरा है। उन्होंने खेल विभाग से कोच की नियुक्ति की मांग की है।
रात में चौकीदार नहीं
खेल विभाग ने दिन के समय एक सुरक्षाकर्मी तैनात किया है, लेकिन रात में चौकीदार की व्यवस्था नहीं है। खिलाड़ियों का आरोप है कि लाखों रुपये खर्च होने के बावजूद सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम नहीं किए गए।
वर्जन
घोघड़ीपुर का नाम खेल नर्सरियों में हर बार शामिल रहता है। अप्रैल में नई नर्सरियां शुरू होने पर तय मापदंडों के अनुसार यहां खेल नर्सरी चालू की जाएगी और पूरे सत्र के लिए एक कोच की व्यवस्था रहेगी। शौचालयों को भी जल्द दुरुस्त कराया जाएगा। -राजबीर सिंह रंगा, जिला खेल अधिकारी