दीप जला कर कार्यक्रम की शुरुआत करते मुख्य अतिथि भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद के उप महानिदेशक (प्र
करनाल। केंद्रीय मृदा लवणता अनुसंधान संस्थान में रविवार को 58वां स्थापना दिवस मनाया गया। इसमें करीब 700 किसान, कृषि विशेषज्ञ व अधिकारी शामिल हुए। इसमें विशिष्ट अतिथि डॉ. अमरेश कुमार नायक ने मृदा स्वास्थ्य के विषय पर बताया कि लगातार भारी मशीनों के उपयोग से हरियाणा और पंजाब की भूमि की उप-सतही कठोर परत बन रही है। अगर समय रहते इसका उचित प्रबंधन नहीं किया गया तो इससे मिट्टी की उर्वरता और उत्पादन क्षमता पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ सकता है।
भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद के उपमहानिदेशक (प्राकृतिक संसाधन प्रबंधन) डॉ. अमरेश कुमार नायक और कंट्री हेड, सिंजेंटा सुशील कुमार और पूर्व निदेशक डॉ. पीवी शर्मा भी उपस्थित रहे। डॉ. पीवी शर्मा ने संस्थान की गतिविधियों व विकसित की गई विभिन्न तकनीकों की जानकारी साझा की। उन्होंने बताया कि संस्थान कृषि व मृदा संरक्षण के क्षेत्र में अनेक नवाचार कर रहा है, जो किसानों के लिए लाभकारी सिद्ध हो रहे हैं। कार्यक्रम में संस्थान के निदेशक डॉ. आरके यादव व विभागाध्यक्षों सहित अन्य वरिष्ठ वैज्ञानिकों ने भी किसानों को संबोधित किया। उन्होंने लवणीय व क्षारीय मृदाओं की समस्या से जूझ रहे किसानों को नवीनतम तकनीकों, लवण-सहनशील फसल किस्मों, मृदा सुधार विधियों तथा लवणीय जल के समुचित उपयोग संबंधी जानकारी दी। वैज्ञानिकों ने प्रदर्शनी के माध्यम से लवण प्रभावित भूमि के सुधार, जैविक खेती, उन्नत सिंचाई तकनीकों तथा विभिन्न फसलों की लवण-सहनशील किस्मों पर जानकारी दी। मंच संचालन डॉ. अनिक कुमार ने किया।