संवाद न्यूज एजेंसी
करनाल। जिले में एक साल में जहां लिंगानुपात में सुधार आया है, वहीं कई गांवों में स्थिति सामान्य नहीं है। इसे देखते हुए अब स्वास्थ्य विभाग उन गांवों में विशेष रखेगा। जिले की छह सीएचसी और 23 पीएचसी में करीब 7 जगह के लिंगानुपात में काफी कमी आई है। इनमें सग्गा, भादसों और खूखनी में बेटियों की संख्या में बड़ा अंतर मिला है। जहां, सग्गा में 2024 2444 लिंगानुपात था वह 2025 में घटकर 563, भादसों में जहां 904 था वह 632 तक आ गया है। साथ ही खूखनी में 1385 से 1021 पर लिंगानुपात आ गया है जो एक साल में काफी बड़ा अंतर है।
लघु सचिवालय के सभागार में प्रसव पूर्व लिंग निर्धारण अधिनियम के तहत गठित जिला स्तरीय सलाहकार समिति की बैठक अतिरिक्त उपायुक्त योगेश कुमार मेहता ने अधिकारियों को इसके लिए विशेष निर्देश दिए हैं। क्षेत्रवार आंगनबाड़ी वर्कर्स, एएनएम व आशा वर्कर्स को लघु फिल्मों व जागरूकता शिविरों के माध्यम से जागरूक करने के निर्देश दिए गए हैं। उन्होंने निर्देश दिए कि शिक्षण संस्थानों के माध्यम से बच्चों को भी इस विषय पर जागरूक किया जाए ताकि वे बचपन से ही इस बारे में जागरूक रहें और साथ ही अपने परिवार को भी जागरूक करें। जलमाना, घरौंडा, भादसों, सग्गा, खुखनी, मधुबन, सांभली में बड़ा अंतर आया है।
अल्ट्रासाउंड केंद्रों पर निरीक्षण के निर्देश
जिले के सभी अल्ट्रासाउंड केंद्रों का समय-समय पर निरीक्षण सुनिश्चित किया जाए ताकि पीएनडीटी अधिनियम का उल्लंघन करने वालों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जा सके। अतिरिक्त उपायुक्त ने बैठक में महिला एवं बाल विकास विभाग के अधिकारियों को गांवों पर विशेष ध्यान देने के निर्देश दिए।
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कम लिंगानुपात वाले क्षेत्र-
क्षेत्र 2024 2025
पीएचसी सग्गा 2444 563
पीएचसी भादसों 904 632
पीएचसी खूखनी 1385 1021
पीएचसी जलमाना 1039 922
सीएचसी घरौंडा 1065 1009
पीएचसी मधुबन 951 759
पीएचसी सांभली 869 748