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Karnal News: पूर्वांचल की राह महंगी, घर जाने के लिए देना पड़ रहा दोगुना किराया

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पुराने बस स्टैंड पर सालवन जाने वाली बस की ​खिलाड़ी में खड़े होकर सफर करते है विद्यार्थी। संवाद
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माई सिटी रिपोर्टर
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करनाल। पूर्वांचल जाने वाले यात्रियों के लिए होली पर घर की राह मुश्किल होती जा रही है। रोडवेज की बसें हैं ही नहीं। ट्रेनों में लंबी वेटिंग है। कई रूटों पर वेटिंग टिकट भी बंद हो चुकी है। टिकट मिलना लगभग नामुमकिन है। वहीं निजी ऑपरेटर बसों का दोगुना तक किराया वसूल रहे हैं।
आम दिनों में जो टिकट 1500 रुपये में मिल जाती थी, उसके लिए 2800 से 3200 रुपये तक वसूले जा रहे हैं। यात्रियों का कहना है कि सीजन और भीड़ का हवाला देकर उनसे दोगुनी रकम ली जा रही है। कुछ यात्री ऑनलाइन बुकिंग की कोशिश कर रहे हैं लेकिन वहां भी सीमित सीटें और बढ़ा हुआ किराया दिखाई दे रहा है। यात्रियों का कहना है कि मांग बढ़ने पर किराया बढ़ना सामान्य बात है लेकिन दोगुनी दर से वसूलना नियमों के दायरे में नहीं आता। घर जाने की मजबूरी के आगे लोग जेब ढीली करने को मजबूर हैं।
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जरूरत पड़ने पर बढ़ाएंगे बस

करनाल डिपो के महाप्रबंधक कुलदीप सिंह ने बताया कि अभी करनाल डिपो से कुछ बसें अन्य प्रदेशों के लिए भी भेजी जाती हैं। देहरादून, हरिद्वार रूट, शामली के लिए बसें चलाई जाती हैं। एक बस कुरुक्षेत्र डिपो की सुबह करनाल के नए बस अड्डे और आईटीआई चौक से मिलती है। यह भी बस रोजाना चलाई जाती है।उन्होंने बताया कि अंतरराज्यीय बस चलाना आसान नहीं है। फिर भी मांग और जरूरत पर हम स्थानीय परमिट कटा कर बसों को भेज सकते हैं। उन्होंने बताया कि पूर्वांचल के लिए रोडवेज का अनुमानित किराया 1000 से 1200 तक है।
यात्रियों का दर्द



सरकार को विशेष बसें चलानी चाहिए। निजी ऑपरेटर खुलेआम मनमानी कर रहे हैं लेकिन रोकने वाला कोई नहीं है। जब मैं पहले घर जाया करता था तब 1500 रुपये में आराम से टिकट मिल जाती थी। अब 3 हजार रुपये मांगे जा रहे हैं। इतना खर्च उठाना मुश्किल है लेकिन घर जाना जरूरी है। - विकास, यात्री
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ट्रेन में वेटिंग भी नहीं मिल रही। निजी बस वाले दोगुना किराया मांग रहे हैं। इससे अधिक परेशानी हो रही है। कोई सुनवाई नहीं है। ट्रेनों की जनरल बोगी भी पूरी तरह भरकर जा रहीं हैं। रोडवेज विभाग को यूपी और बिहार के लिए बसों के इंतजाम करने चाहिए। जिससे यात्रियों को असुविधा न हो। - अजय, यात्री
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