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Karnal News: गूंजदे जयकारे सी खामोश हो गए, माये तेरे पौतरे शहीदी पा गए...

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प्रेम नगर में  छोटे साहिबजादों की शहादत के उपलक्ष्य में आयोजित लंगर में प्रसाद ग्रहण करते श्रद्
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संवाद न्यूज एजेंसी
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करनाल। गूंजदे जयकारे सी खामोश हो गए, माये तेरे पौतरे शहीदी पा गए... जैसे शबद दिनभर गूंजते रहे। मौका था वीर बाल दिवस का। शुक्रवार को सिख धर्म के दसवें गुरु श्री गुरु गोबिंद सिंह जी महाराज के छोटे साहिबजादों बाबा जोरावर सिंह, बाबा फतेह सिंह एवं माता गुजरी कौर जी की शहादत की स्मृति में शहर में श्रद्धा, सेवा और समर्पण का अनुपम संगम देखने को मिला। शहर के विभिन्न क्षेत्रों में श्रद्धालुओं द्वारा जगह-जगह लंगर का आयोजन कर मानव सेवा का संदेश दिया। वहीं कई जगह गुरु का शबद कीर्तन भी हुआ। लंगर के माध्यम से सड़क से गुजरने वाले वाहन चालकों, राहगीरों को प्रेमपूर्वक प्रसाद वितरित किया गया।

प्रेम नगर स्थित आर्य समाज मंदिर के सामने राम नगर के सिख युवकों जस्सा सिंह, रमन सिंह, दीप सिंह, गुरवंश सिंह और हरमन सिंह द्वारा छोटे साहिबजादों की शहादत की स्मृति में लंगर का आयोजन किया गया। लंगर में कढ़ी-चावल, ब्रेड पकौड़े, चाय तथा पकौड़ों का प्रसाद तैयार कर श्रद्धालुओं और राहगीरों को वितरित किया गया। प्रसाद ग्रहण करने वालों में सभी वर्गो के लोग शामिल रहे, जिससे सामाजिक समरसता और भाईचारे का संदेश भी देखने को मिला।
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इसके अतिरिक्त रेलवे रोड सहित अन्य स्थानों पर भी श्रद्धालुओं ने सेवा भावना के साथ गर्म दूध और पकौड़ों के लंगर की व्यवस्था की। जस्सा सिंह ने कहा कि छोटे साहिबजादों का बलिदान मानव इतिहास में अद्वितीय है। मात्र 6 वर्ष और 9 वर्ष की आयु में उन्होंने धर्म, आस्था और सत्य की रक्षा के लिए अपने प्राणों को बलिदान कर दिया। लेकिन अत्याचार और अन्याय के सामने झुकने से स्पष्ट रूप से इंकार कर दिया। उनका यह बलिदान आने वाली पीढ़ियों के लिए साहस, दृढ़ता और आत्मसम्मान की अमर प्रेरणा है।
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श्रद्धालु प्रीतपाल सिंह ने कहा कि छोटे साहिबजादों की शहादत हमें सिखाती है कि सच्चाई और धर्म की राह पर चलने के लिए उम्र नहीं, बल्कि मजबूत संकल्प और अटूट विश्वास की आवश्यकता होती है। लंगर के आयोजन के माध्यम से न केवल उनकी शहादत को नमन किया गया, बल्कि गुरु परंपरा के अनुसार सेवा और समानता के संदेश को भी जन-जन तक पहुंचाया गया।
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