मानसी मौर्य/संवाद
करनाल। सास-बहू के बीच विवाद पति-पत्नी के संबंधों में दरार डाल रहे हैं। मामला तलाक तक पहुंच रहा है। महिला थाने में हर माह 15 से 20 मामले ऐसे पहुंचते हैं जिनमें महिलाओं की शिकायत उनकी सास से होती है। छोटी-छोटी बातों पर तनाव बढ़ जाता है। अधिकांश मामलों में महिला थाने में काउंसिलिंग से रास्ता निकाला जाता है।
महिला थाना प्रभारी कन्नूप्रिया ने बताया कि अधिकतर केस आपसी समझ और धैर्य से सुलझाए जा सकते हैं, लेकिन परिवार के लोग अक्सर तुरंत फैसला लेने की कोशिश करते हैं। पहले संयुक्त परिवारों में बड़ों की मध्यस्थता से झगड़े जल्दी सुलझ जाते थे, लेकिन अब अधिकांश युवा अपनी अलग सोच और स्वतंत्र जीवन जीने की चाह रखते हैं। ऐसे में जब सास-बहु के बीच कोई विवाद होता है, तो वह घर की चारदीवारी से निकलकर थाने तक पहुंच जाता है।
बहू के नौकरी करने पर है सास को एतराज
सेक्टर की 28 वर्षीय महिला ने महिला थाना में आकर शिकायत दर्ज कराई कि उनकी सास नौकरी करने नहीं दे रही। वह पढ़ी-लिखी हैं और शादी से पहले प्राइवेट स्कूल में पढ़ाती थीं। शादी के बाद उन्होंने नौकरी जारी रखी। कुछ ही समय बाद सास ने विरोध करना शुरू कर दिया। काउंसलर ने दोनों पक्षों को बुलाकर समझाया। पति और सास को बताया गया कि काम करना उनका हक है, वहीं पत्नी को समझाया गया कि परिवार की जिम्मेदारियों को निभाते हुए नौकरी करना ही बेहतर रास्ता है। लगातार हुई तीन बैठक के बाद सास ने बहू के नौकरी करने पर सहमति जता दी। बहू ने भी नौकरी और परिवार में संतुलन की बात कही।
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पति बेरोजगार, सास नहीं कहने देती कोई बातसेक्टर से आए एक मामले में पत्नी ने सास के हमेशा पति के पक्ष में खड़े रहने की बात कही। उन्होंने बताया कि पति पिछले दो साल से नौकरी नहीं कर रहे। वह काम करती हैं और घर का सारा खर्च उनकी नौकरी से ही चल रहा है। पति ने शराब पीना भी शुरू कर दिया। वह उनको नौकरी करने या शराब को लेकर टोकती हैं तो सास विवाद करती हैं। थाना की काउंसिलिंग टीम ने पति से बात की। दो बार की काउंसिलिंग में उनको रोजगार ढूंढ़ने की सलाह दी गई। शराब की लत छुड़ाने के लिए हेल्थ सेंटर से काउंसिलिंग की व्यवस्था की गई। धीरे-धीरे पति में बदलाव आया।
बहू के मायके जाने पर विवाद थाने पहुंचा
वसंत बिहार में बहू के बार-बार मायके जाने पर सास ने आपत्ति जताई तो मामला महिला थाने तक पहुंच गया। सास का आरोप था कि बहू अक्सर अपने मायके जाने को लेकर विवाद करती है। बहू का कहना था कि उनकी मां बीमार रहती हैं। हर सप्ताह मायके जाकर देखभाल करना चाहती हैं। सास को यह बात नागवार गुजरती है। पति भी मां के पक्ष में रहते हैं। दोनों पक्षों को बैठाकर समझाया। पति को समझाया गया कि पत्नी का मायके जाना कोई गलती नहीं, बल्कि उनकी जिम्मेदारी है। महिला से भी कहा गया कि वह संतुलन बनाएं। काउंसिलिंग के बाद सास और पति महिला को हर पंद्रह दिन में मायके जाने देने के लिए राजी हो गए। जरूरत पड़ने पर साथ जाने की भी हामी भरी।