माई सिटी रिपोर्टर
करनाल। सेंसर संवेदी तकनीक के जरिये अब फल, फूल और सब्जियों के अलावा मसालों की गुणवत्तापूर्ण पैदावार बढ़ाई जा सकेगी। इसके लिए कोच्चि विश्वविद्यालय जापान के पास मौजूद पौधों के इंटरनेट यानी इंटरनेट्स ऑफ फ्लांट्स (आईओपी) तकनीक भारत के किसानों तक पहुंचाई जाएगी।
इस तकनीक के जरिये पौधे की भौतिक, शारीरिक व जैविक गतिविधियां पता लगाई जाएंगी और उसके आधार पर आभासिक एडवाइजरी जारी हो सकेगी। यानी आने वाले खतरे की पहचान पहले ही हो सकेगी।
पौधे को कब खाद या पानी की कितनी जरूरत है, इसका डाटा भी मिल सकेगा। इस तकनीक के लिए भारत और जापान के बीच करार हो गया है।
महाराणा प्रताप बागवानी विश्वविद्यालय (एमएचयू) करनाल के कुलपति प्रो. सुरेश मल्होत्रा के अनुसार पूरा विश्व जलवायु परिवर्तन की चुनौतियों से निपटने के लिए जुटा है। क्योंकि इसके कारण प्राकृतिक आपदाएं, असमय ओलावृष्टि, कम समय में अधिक बरसात, असमय सूखा, अधिक सर्दी आदि से नुकसान की आशंका बनी रहती है। इससे सर्वाधिक मझौले व छोटे किसान प्रभावित होते हैं, जो भारत में अधिक हैं। इन चुनौतियों से निपटने की दिशा में यह तकनीक बेहतर है।
जापान के कोच्चि विश्वविद्यालय के अध्यक्ष प्रो. उकेडा हिरोयूकी और महाराणा प्रताप बागवानी विश्वविद्यालय (एमएचयू) करनाल के कुलपति प्रो. सुरेश मल्होत्रा के बीच शुक्रवार को मुख्यमंत्री नायब सैनी और कृषिमंत्री श्याम सिंह राणा की मौजूदगी में इसको लेकर करार हुआ था। इसके बाद जापानी वैज्ञानिकों का दल शनिवार को एमएचयू पहुंचा। यहां विश्वविद्यालय का भ्रमण करके वैज्ञानिकों से बातचीत की।