घरौंडा। अनाज मंडी में किसानों का धान कम रेट पर खरीदने की आशंका पर एसडीएम ने मार्केट कमेटी व सरकारी एजेंसियों के साथ नई अनाज मंडी का निरीक्षण किया। जब खरीद एजेंसी के निरीक्षक ने नमी चेक की तो 31 मिली, जबकि आढ़ती ने अपनी मशीन से चेक की तो 24 मिली। किसानों और आढ़तियों ने भी आपत्ति दर्ज की। उन्होंने कहा कि अब एसडीएम के सामने ही एजेेंसियों द्वारा गड़बड़ी करने का खुलासा हो गया है। इन पर कार्रवाई होनी चाहिए।
बुधवार को एसडीएम अदिति शर्मा अनाज मंडी पहुंचीं। अनाज मंडी में पहुंचते ही एसडीएम ने मार्केट कमेटी अधिकारी, राइस मिलरों, सरकारी एजेंसियों के अलावा ठेकेदारों के साथ मार्केट कमेटी कार्यालय में बैठक की और लिफ्टिंग व धान खरीद के बारे में जानकारी हासिल की। एसडीएम अधिकारियों को साथ लेकर मंडी में पड़ी धान की अनेक ढेरियों पर गईं। मौके पर अनेक किसानों से बातचीत की। मंडी में धान की फसल लेकर आ रहे कई किसानों ने एसडीएम के समक्ष उनकी धान का उचित मूल्य न लगाए जाने की शिकायत की। एसडीएम ने तुरंत नीम मीटर को मंगवा कर धान की नमी को चेक किया, लेकिन अधिकतर किसानों की धान में सरकार की हिदायतों से ज्यादा नमी पाई गई। एसडीएम ने किसानों से आग्रह किया कि वे अपनी धान की फसल को सुखाकर लाएं या मंडी में लाकर उन्हें कुछ समय के लिए सुखा दे, ताकि उसकी नमी की मात्रा दूर हो जाए और सरकारी मापदंडों पर नमी होने पर उनकी धान खरीदी जा सके।
सफाई ठेकेदार का भुगतान रोका
मंडी में धान का सीजन आधे से ज्यादा खत्म हो चुका है, लेकिन सफाई व्यवस्था का आज भी बुरा हाल है। मंडी के एक कोने में कूड़े के ढेर लगे हैं। एसडीएम के समक्ष मंडी में सफाई व्यवस्था को लेकर कई आढ़तियों ने शिकायत रखी। जिस पर एसडीएम ने मार्केट कमेटी सचिव को ठेकेदार का भुगतान रोकने के निर्देश दिए।
धान में नमी अधिक बताकर किया परेशान
करनाल। जिले की अनाज मंडियों में बुधवार को भी धान की आवक कम रही। किसानों के धान में नमी अधिक बताकर खरीद एजेंसियों और राइस मिलरों ने काफी परेशान किया। धान का भाव 1900 से 2000 रुपये प्रति क्विंटल रहा। फिर भी जिले की अनाज मंडियों में दो लाख 17 हजार 940 क्विंटल की खरीद की गई, जिससे कुल खरीद 73 लाख 87 हजार 130 क्विंटल हो गई है। मंडियों में धान का कुल उठान 80.49 प्रतिशत पहुंच गया। किसानों का कहना है कि राइस मिलर खरीद एजेंसियों के निरीक्षक, मंडी समिति कर्मी और आढ़ती मिलकर गोलमाल कर रहे हैं। सर्वाधिक परेशानी खरीद एजेंसियों के निरीक्षकों से है, क्योंकि वह खरीद की बजाय दूसरे कार्यों में लगे हैं। एक किसान ने बताया कि मंडियों में बोली व्यवस्था ध्वस्त हो गई है। एक राइस मिलर आता है, ढेरी का मनमाना रेट लगाता है, किसान हां करता है तो वापस चला जाता है, फिर न जाने कैसे किसान का धान बिक जाता है, जितना कम रेट होता है, उसके चेक पर हस्ताक्षर करा लेते हैं। मंडियों से बुधवार की शाम तक कुल 59 लाख, 46 हजार, 320 क्विंटल धान का उठान हो चुका है, जो कुल खरीद का 80.49 प्रतिशत है, अभी मंडियों में 14 लाख 40 हजार 810 क्विंटल धान पड़ा है। संवाद