संवाद न्यूज एजेंसी
करनाल। शहर की हवा में घुल रही धूल और धुएं ने अब त्वचा पर भी असर दिखाना शुरू कर दिया है। लगातार बढ़ रहे स्मॉग और प्रदूषण के बीच जिला नागरिक अस्पताल की त्वचा रोग ओपीडी में मरीजों की संख्या में बढ़ोतरी दर्ज की जा रही है। प्रदूषित हवा में मौजूद सूक्ष्म कण त्वचा के रोमछिद्रों को बंद कर रहे हैं, जिससे खुजली, जलन और मुंहासों की समस्या बढ़ गई है।
त्वचा रोग विशेषज्ञ डॉ. प्रदीप ने बताया कि कुल 150 मरीजों की ओपीडी हो रही है। सबसे अधिक कील-मुंहासें, रुखी त्वचा, जलन और खुजली जैसी समस्या आ रही हैं। उन्होंने बताया कि रोजाना करीब 10 से 12 मरीज खुजली, 10 से 15 कील मुहांसे और 15 से 20 रुखी और पपड़ीदार त्वचा संबंधी परेशानी लेकर आ रहे हैं। इनमें अधिकतर महिलाएं और युवा हैं, जिन्हें चेहरे पर मुंहासे, खुजली, त्वचा पर चकत्ते या एलर्जी की शिकायत है।
- धूल के कणों से बंद हो रहे रोमछिद्र
त्वचा रोग विशेषज्ञ डॉ. प्रदीप के अनुसार, हवा में मौजूद धूल और धुएं के सूक्ष्म कण त्वचा की ऊपरी परत में जमा होकर रोमछिद्रों को बंद कर देते हैं, जिससे ऑक्सीजन की आपूर्ति बाधित होती है। इसका परिणाम त्वचा की रुखापन, दाग-धब्बे और संक्रमण के रूप में सामने आता है। उन्होंने बताया कि सर्दियों में नमी कम होने के कारण यह समस्या और गंभीर हो जाती है। लेकिन प्रदूषण के कारण समस्या अधिक बढ़ गई है।
- बच्चों और बुजुर्गाें में तेजी से फैल रहा संक्रमण
डॉ. प्रदीप ने कहा कि प्रदूषित हवा से त्वचा की ऊपरी परत कमजोर होती है, जिससे वह बाहरी संक्रमण के प्रति अधिक संवेदनशील हो जाती है। कई मरीजों में आंखों के आसपास जलन और चेहरे पर लालिमा की शिकायतें देखी गई हैं। उन्होंने बताया कि बच्चों में त्वचा संक्रमण तेजी से फैल रहा है जबकि बुजुर्गों में सूखापन और फटने की समस्या अधिक देखी जा रही हैं। ऐसे में बच्चों और बुजुर्गों को खास ध्यान रखना चाहिए।
- सावधानी ही बचाव
बाहर निकलते समय चेहरा और सिर ढकें
घर लौटने पर तुरंत चेहरा व हाथ धोएं
मॉइस्चराइजर और सनस्क्रीन का नियमित उपयोग करें
प्राकृतिक तत्वों से बने मॉइस्चराइजर का प्रयोग करें
पीएच अनुसार फेसवॉश या बाथ साबुन लें
पर्याप्त पानी पीकर शरीर को हाईड्रेट रखें
रात में सोने से पहले चेहरा धोकर मॉइस्चराइज करें
पीएच-संतुलित साबुन लें, जिसका पीएच 4.5 और 7 के बीच हो