संवाद न्यूज एजेंसी
करनाल। जिला उपभोक्ता विवाद निवारण आयोग ने स्वास्थ्य बीमा के एक मामले में केयर हेल्थ इंश्योरेंस के खिलाफ सख्त फैसला सुनाया है। आयोग ने बीमा कंपनी को न केवल शिकायतकर्ता का मेडिकल क्लेम पास करने का आदेश दिया बल्कि पॉलिसी को दोबारा बहाल करने और मानसिक प्रताड़ना के लिए हर्जाना भरने का भी निर्देश दिया। क्लेम मांगने पर कंपनी ने प्रीमियम की राशि नहीं मिलने का हवाला देते हुए पॉलिसी को रद्द कर दिया था। आयोग ने कहा कि प्रीमियम नहीं मिलने पर तुरंत पॉलिसी रद्द की जानी चाहिए थी। क्लेम मांगने पर नहीं।
गोहिदा गांव निवासी शिकायतकर्ता मनोज कुमार ने पेटीएम के माध्यम से अक्तूबर, 2022 में केयर हेल्थ इंश्योरेंस की पॉलिसी खरीदी थी। उन्होंने 15 हजार 325 रुपये का प्रीमियम चुकाया था। मार्च, 2023 में उनकी बेटी बीमार हुई। इलाज पर 19 हजार 320 रुपये खर्च हुए। कंपनी से क्लेम मांगा तो कंपनी ने यह कहकर भुगतान करने से मना कर दिया कि उनकी पॉलिसी रद्द कर दी गई है। कंपनी का तर्क था कि तकनीकी कारणों से उन्हें प्रीमियम की राशि प्राप्त नहीं हुई थी, इसलिए उन्होंने पॉलिसी रद्द कर दी और प्रीमियम वापस कर दिया।
सुनवाई के दौरान आयोग के अध्यक्ष जसवंत सिंह की अध्यक्षता वाले आयोग ने पाया कि बीमा कंपनी ने पॉलिसी तब रद्द की जब ग्राहक ने क्लेम मांगा। आयोग ने कहा कि यदि प्रीमियम प्राप्त नहीं हुआ था तो पॉलिसी तुरंत रद्द की जानी चाहिए थी न कि क्लेम आने के बाद करनी थी। कंपनी की यह कहानी केवल अपनी जिम्मेदारी से बचने के लिए गढ़ी गई प्रतीत होती है। इसलिए क्लेम खारिज करना और बिना किसी ठोस कारण के पॉलिसी रद्द करना सेवा में कमी और अनुचित व्यापार व्यवहार की श्रेणी में आता है।
इलाज के खर्च के साथ देना होगा दस हजार का मुआवजा
आयोग ने शिकायतकर्ता के पक्ष में फैसला सुनाते हुए केयर हेल्थ इंश्योरेंस को शिकायतकर्ता से 15 हजार 325 रुपये प्रीमियम लेकर पॉलिसी को सभी पुराने लाभों के साथ दोबारा शुरू करने के आदेश दिए। इसके साथ ही शिकायतकर्ता की बेटी के इलाज पर खर्च हुए 19 हजार 320 रुपये की राशि नौ प्रतिशत वार्षिक ब्याज के साथ चुकाने के आदेश जारी किए। उपभोक्ता को हुई मानसिक पीड़ा और उत्पीड़न के लिए 10 हजार रुपये का मुआवजा देने के आदेश दिए। मुकदमे पर खर्च के रूप में पांच हजार 500 रुपये का भुगतान करने के लिए भी कहा। आयोग ने इन आदेशों को 45 दिनों के भीतर लागू करने का समय दिया।