फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

मरीज का मेडिकल बना डाक्टरों के गले की फांस

Fri, 07 Feb 2014 11:25 PM IST
अमर उजाला ब्यूरो/करनाल
विज्ञापन
विज्ञापन
शहर के कल्पना चावला मेडिकल कालेज में एक मरीज का मेडिकल करने का मामला कई डाक्टराें के गले की फांस बन गया है। मामला पुलिस थाने से लेकर हाईकोर्ट तक पहुंच चुका है।
विज्ञापन


इस केस में डाक्टरों ने ही एक-दूसरे को कटघरे में खड़ा कर दिया है। एक डाक्टर गलत रिपोर्ट बनवाने का दबाव बनाने की बात कर रहा है तो दूसरा अपने पर लगे आरोप को निराधार बताने के साथ डाक्टर पर उसे फंसाने की साजिश रचने का आरोप मढ़ रहा है।

दोनों डाक्टर पूरे मामले में हुई अपनी-अपनी कार्रवाई को कानूनी दायरे के अनुरूप पूरी तरह सही बता रहे हैं।

करीब आठ महीने पूर्व 30 जून 2013 की रात में थाना निसिंग क्षेत्र के गांव बोहला खालसा में कई लोगों के बीच किसी बात को लेकर झगड़ा हो गया था। झगडे़ में कई लोगों को चोटें आई थीं। उपचार के लिए मरीजों को करनाल के मेडिकल कालेज लाया गया।
विज्ञापन


इसी झगडे़ में गांव पिचौलिया निवासी भारत भूषण भी घायलों में शामिल था। उसे भी उपचार दिलाया गया। मेडिकल के दौरान उसका अल्ट्रासाउंड भी कराया गया। अभी तक सामने आए पूरे रिकार्ड के लिहाज से अल्ट्रासाउंड की रिपोर्ट में भारत भूषण के पेट में तिल्ली में जख्म होने की पुष्टि हो रही है।

इस मरीज के अल्ट्रासाउंड की रिपोर्ट में गड़बड़ करने का दबाव होने के कारण मामला डाक्टरों की फजीहत होने का लगता है।

कई डाक्टरों ने दिया था उपचार मेडिकल कालेज के डाक्टर अजय शेर द्वारा झगडे़ में घायल मरीज भारत भूषण का अल्ट्रासाउंड किया गया था।

रिपोर्ट के अनुसार कोई तेजधार चीज लगने से भारत भूषण की तिल्ली फटने की पुष्टि की गई थी। डॉ. अजय शेर का आरोप है कि अस्पताल के उप चिकित्सा अधीक्षक डा. योगेश शर्मा नहीं चाहते थे कि भारत भूषण के जख्म रिपोर्ट में दर्शाए जाए।

इसी बात पर मामला तूल पकड़ गया। डाक्टरों का ओपिनयन मांगा गया। कई डाक्टरों ने इसमें मरीज को उपचार देने का काम किया।  
 
मामले में बड़ी साजिश होने का अंदेशा
मामला अब दोनों पक्षों के बीच इतना गहरा गया था कि अदालत तक पहुंच गया। एसीजेएम केपी सिंह की अदालत ने 30 जुलाई को इस मामले में मेडिकल के लिए कोई नया बोर्ड गठित नहीं करने के लिए कहा था, लेकिन इसके बावजूद 14 अगस्त 2013 को तीन डाक्टरों के बोर्ड से अल्ट्रासांउड कराया गया।

इसमें मरीज को कोई इंजरी नहीं होने की बात सामने आई है। यहीं से आरोप-प्रत्यारोप शुरू हुए। प्रारंभिक तौर पर भारत भूषण के पेट में तिल्ली में जख्म दिखाए गए। डाक्टरों ने उपचार भी दिया। बाद में डाक्टरों के बोर्ड ने साबित किया कि भारत भूषण को चोट नहीं आई है। यह अपने-आप में बड़ा गंभीर मामला है।

डाक्टर की मां ने जड़ा बेटे को परेशान करने का आरोप
अल्ट्रासाउंड करने वाले डॉ. अजय शेर की मां निर्मल कैरो का आरोप है मेडिकल कालेज के उच्चाधिकारी उनके बेटे पर गलत रिपोर्ट देने का दबाव बना रहे थे। उनके बेटे ने ऐसा नहीं किया तो उसे पूरी तरह तंग किया गया। डाक्टर की मां ने उसके बेटे अजय शेर का तबादला तक करवाने का आरोप लगाया है।

हां, मुझ पर बनाया गया था गलत रिपोर्ट करने का दबाव
डॉ.अजय शेर ने कहा कि मामला बहुत पेचीदा है। उन पर उप चिकित्सा अधीक्षक ने मरीज के पेट में आई चोट के जख्म नहीं दिखाने के लिए दबाव बनाया था। वह अपने पेशे के साथ ऐसा नहीं कर सकते। मरीज को चोटें आई हैं तो वे दिखाई जाएंगी।

उसके बाद ही मरीज का उपचार हो सकेगा। वह किसी के लिए गलत रिपोर्ट नहीं करते। डाक्टराें के बोर्ड भी अपनी रिपोर्ट में सब कुछ साबित कर सकते हैं, लेकिन जो मेडिकल तीन डाक्टरों द्वारा किया गया है, वह किसी साजिश के तहत किया गया है।

वह इस मामले में हाईकोर्ट जा चुके हैं। सरकार और उप चिकित्सा अधिकारी को नोटिस भेजा जा चुका है। दूसरी ओर उन पर कल्पना चावला मेडिकल कालेज के निदेशक की शिकायत पर उप चिकित्सा अधीक्षक को धमकी देने का आरोप लगा कर पुलिस में मामला दर्ज कराया गया।

इस मामले में भी उनके पास सारे सबूत हैं। ट्रांसक्रिप्शन से साबित हो गया कि उनकी उप चिकित्सा अधीक्षक से नहीं किसी अन्य से बात हुई है।   

डॉ. अजय शेर रच रहे हैं साजिश
डॉ. अजय शेर और उनकी मां ने जो भी आरोप लगाया है वह पूरी तरह गलत और निराधार है। रोजाना सैंकडों मरीज उपचार के लिए आते हैं। वह कभी ऐसा नहीं करते। डाक्टरों से गलत काम करवाने का कोई मतलब नहीं बनता। वह भी जानते हैं कोई किसी के लिए गलत काम नहीं करता। उन लोगाें ने जो कुछ भी किया है वह पूरा मामला कानूनी ढंग से बनता था। जो कानूनी लिहाज से बना वही किया गया है। इसके अलावा कुछ नहीं है। उल्टा उन्हें डॉ. अजय शेर ने धमकी दी है। इस संबध में कालेज के निदेशक की ओर से एसपी को शिकायत की गई थी। इस शिकायत में कार्रवाई होने से बचने के लिए डाक्टर उल्टा उन्हें फंसाने की साजिश रच रहा है। जांच होगी तो पूरा मामला साफ हो जाएगा।
विज्ञापन

-डा. योगेश शर्मा, उप चिकित्सा अधीक्षक, कल्पना चावला राजकीय मेडिकल कालेज (अस्पताल) करनाल


विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें