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Karnal News: किराये पर दिए गए वाहन से अपराध पर भी मालिक होगा जिम्मेदार

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गगन तलवार
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करनाल। अपनी कार को अगर आप कुछ रुपये लेकर एक या दो दिन के लिए किराये पर देते हैं या फिर किसी दोस्त या अन्य की बात में आकर उसे वाहन चलाने के लिए देते हैं तो सतर्कता बरतें। पूरी छानबीन कर ही ऐसा करें। आपके वाहन से यदि कोई आपराधिक गतिविधि या चालक की लापरवाही से हादसा होता है तो आप को ही जिम्मेदार माना जाएगा।
पुलिस वाहन के नंबर के आधार पर कार्रवाई करती है। वाहन के नंबर से वही व्यक्ति आरोपी बनता है जिसके नाम पर वाहन पंजीकृत होता है। करनाल में एक साल में 10 से 12 ऐसे मामले सामने आ चुके हैं, जिनमें बदमाशों ने किराये के वाहन लेकर या दूसरे की गाड़ी से चोरी, लूट या स्नेचिंग की वारदात को अंजाम दिया। वाहन के नंबर से हुई जांच के दौरान वाहन के चोरी होने या किसी दूसरे को दिए जाने का खुलासा हुआ। प्राथमिक जानकारी में वाहन का नंबर सामने आने पर पुलिस ने वाहन मालिक को ही आरोपी बनाया।
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सड़क सुरक्षा विशेषज्ञ एडवोकेट संदीप राणा ने बताया कि बीएनएस की धारा-106 और मोटर व्हीकल एक्ट-1988 के तहत कार्रवाई की जाती है। पुलिस की जांच के दौरान वाहन की आरसी सहित अन्य दस्तावेज की जांच होती है। इसमें चालक का केवल ड्राइविंग लाइसेंस देखा जाता है। ऐसे में यदि लापरवाही के कारण कोई हादसा हो जाए तो पुलिस वाहन के नंबर से जांच करते हुए संबंधित मालिक को ही पकड़ती है। दिल्ली में हुए धमाके के मामले में भी पुलिस वाहन के नंबर से आरोपियों तक पहुंची है।

यातायात पुलिस के सेवानिवृत्त निरीक्षक कर्मबीर का कहना है कि घर में वाहन एक व्यक्ति के नाम पर होता है और पूरा परिवार उसे चलाता है। ऐसे में चेकिंग के दौरान दस्तावेज ही देखे जाते हैं।

अनजान या अनाड़ी को वाहन देने से बचें : आरटीए
आरटीए विजय देसवाल का कहना है कि ऐसे व्यक्ति को वाहन देने से बचना चाहिए जो आपराधिक गतिविधियों में संलिप्त रहा हो या फिर जिसकी गतिविधियां संदिग्ध हों। इनकी गलती या आपराधिक गतिविधि वाहन मालिक को परेशानी में डाल सकती है। इसके अलावा अनाड़ी व्यक्ति, जिसे वाहन चलाने का ज्यादा अभ्यास न हो, को भी वाहन देने से बचना चाहिए। क्योंकि उसकी लापरवाही के कारण होने वाले हादसे के कारण भी वाहन मालिक को परेशानी उठानी पड़ सकती है।



वाहनों के नंबरों से पुलिस आरोपियों तक पहुंची

केस-1

- दिल्ली से किराये पर कार लेकर आए थे बदमाश

उत्तर प्रदेश के दादरी और बागपत के रहने वाले तीन बदमाशों ने 26 अक्तूबर की रात को करनाल आकर दुकानों के ताले व शटर तोड़कर चोरी की वारदातों को अंजाम दिया था। पूछताछ में सामने आया है कि आरोपी दिल्ली से किराये की कार लेकर वारदात को अंजाम देने के लिए करनाल आते थे। वे शाम को शहर में पहुंचने के बाद कर्ण गेट सहित अन्य बाजारों में घूमकर रेकी करते थे। इस दौरान वे तय कर लेते थे कि कहां चोरी की जा सकती है। इसके बाद रात में 2 से तड़के 4 बजे के बीच वे वारदाम को अंजाम देते थे।



केस-2

- चोरी की बाइक पर पटियाला से आते थे स्नेचर

अक्तूबर माह में चेन स्नेचिंग की पांच वारदातों को बाइक सवार तीन आरोपियों ने अंजाम दिया। इनमें से दो आरोपी पंजाब के पटियाला निवासी जतिन भारद्वाज उर्फ नन्नू और परमजीत उर्फ प्रिंस अंबाला से चोरी की बाइक से करनाल पहुंचकर वारदात को अंजाम देते थे। राष्ट्रीय राजमार्ग-44 से ही वे अलग-अलग दिन करनाल आए और वारदात को अंजाम देकर भाग गए। बाइक के नंबरों से पुलिस आरोपियों तक पहुंची। बाद में पता चला कि आरोपियों ने पहले बाइक चोरी की इसके बाद वारदातों में इसे इस्तेमाल किया।
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वाहन के दस्तावेज पूरे रखें। यदि उसे बेचते हैं तो खरीदार के नाम पर ट्रांसफर भी कराएं। किसी तरह के अपराध या हादसा होने पर पुलिस उसी व्यक्ति तक पहुंचती है, जिसके नाम पर वाहन पंजीकृत होता है। - गंगाराम पूनिया, एसपी करनाल
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