फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

Karnal News: दो बाइकों की भिड़ंत में सात बहनों के इकलौते भाई की गई जान

विज्ञापन
विज्ञापन
- होली की शाम जबाला गांव के पाास हुआ हादसा, 24 साल पहले बेटे की चाह पूरी करने के लिए पिता ने भाई से गोद लिया था सागम
विज्ञापन

माई सिटी रिपोर्टर

करनाल/असंध। जबाला गांव के पास बुधवार को फाग की शाम दो बाइकों की आमने-सामने भिड़ंत हो गई। इस हादसे में सात बहनों के इकलौते भाई असंध के वार्ड-8 स्थित विश्वकर्मा कॉलोनी निवासी 24 वर्षीय सागर की मौत हो गई। सात बेटियों के बाद बेटे की चाहत को पूरा करने के लिए बिजली निगम में लाइनमैन रहे मामू राम ने भाई के बेटे को गोद लिया था। असंध थाना पुलिस ने प्राथमिकी दर्ज कर ली है।

परिवार के अनुसार, असंध में एल्यूमिनियम दरवाजों की दुकान चलाने वाले सागर परिवार का इकलौता सहारा थे। बुधवार की शाम को वह किसी काम से गए थे, वापस लौटते समय जबाला गांव के पास उनकी बाइक की सामने से आ रही बाइक से टकरा गई। टक्कर इतनी तेज थी कि दोनों सड़क पर जा गिरे। प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, हादसे में दोनों बाइक चालकों को चोटें आई जिन्हें असंध के सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र ले जाया गया। जहां से प्राथमिक उपचार के बाद सागर की हालत को देखते हुए उसे जिला नागरिक अस्पताल रेफर कर दिया गया लेकिन यहां आने तक उसने दम तोड़ दिया। दूसरा बाइक चालक उपचाराधीन है। असंध थाना के जांच अधिकारी रमेश का कहना है कि हादसे के कारणों की जांच की जा रही है।
विज्ञापन


मोहल्ले में पसरा रहा मातम

वार्ड-8 स्थित विश्वकर्मा कॉलोनी की गली में वीरवार को मातम पसरा रहा। सात बेटियों के बाद जिस बेटे को गोद लेकर परिवार ने अपने आंगन की अधूरी ख्वाहिश पूरी की थी उसकी सड़क हादसे में मौत से हर कोई दंग था। मोहल्ले के लोगों में सागर के बारे में चर्चा होती रही।



पिता बोले- बुढ़ापे का सहारा टूट गया

बुजुर्ग पिता मामू राम और मां का कहना है कि उनके बुढ़ापे का सहारा सागर था। उसे भी सड़क हादसे ने छीन लिया है। उनका कहना है कि सात बेटियों के बाद बेटे की कमी उन्हें हमेशा महसूस होती थी। परिवार ने सागर को भरपूर स्नेह दिया, पढ़ाया-लिखाया और अपने सपनों का सहारा बनाया। समय के साथ वह घर की जिम्मेदारियों को समझने लगा था।
विज्ञापन




तीन वर्षीय बेटी की चिंता

सागर की शादी हो चुकी थी और उनकी तीन वर्ष की एक बेटी है। वह अक्सर बेटी को कंधे पर बैठाकर गली में घूमते थे। पड़ोसी बताते हैं कि पिता बनने के बाद वह परिवार के भविष्य को लेकर योजनाएं बनाया करता था। परिवार के सामने अब सबसे बड़ी चिंता सागर की मासूम बेटी का भविष्य है।
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें