करनाल। जैन स्थानक में चातुर्मास बिता रहे उपेंद्र मुनि महाराज ने प्रवचन के दौरान कहा कि जो अपना और दूसरों का कार्य साधता है वह साधु है। कार्य सिद्ध करने का अर्थ अपना मतलब सिद्ध करना नहीं है। अपितु जो अपने और दूसरों के कल्याण के लिए अहर्निश होकर परिवर्तनशील रहता है वही साधु है।
सेक्टर 14 जैन स्थानक में धर्म सभा में शास्त्री उपेंद्र मुनि महाराज ने कहा कि इस संसार में सभी लोग सम्मान चाहते हैं, तिरस्कार किसी को भी पसंद नहीं है। लेकिन सम्मान चाहने वालों को अपनी योग्यता का आकलन करना चाहिए। विचार करना चाहिए कि क्या मेरा जीवन इस योग्य है, जिससे लोग मेरे को पूजें, वंदना करें। उन्होंने कहा कि साधु अपना कल्याण करने के साथ-साथ जो भी जिज्ञासु संपर्क में आए उनका जीवन निर्माण कैसे हो। कल्याण कैसे हो इस पर चिंतन करके निष्कर्ष प्रस्तुत करें। परंतु आज का साधु इस उद्देश्य से भटक गया लगता है। उन्हें इस चीज का भान हीं नहीं है कि हमने साधु जीवन किस लिए अंगीकार किया था। न तो वह स्व कल्याण में लगते हैं और न ही पर कल्याण में। मां पद्मावती महिला मंडल, मनोज जैन आदि मौजूद रहे। ब्यूरो