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Karnal News: 80 लाख से अधिक का था मामला, आयोग ने कहा-अधिकार क्षेत्र से बाहर

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करनाल। करीब 80.50 लाख रुपये के एसएमई लोन के साथ जमा कराई गई 2.42 लाख रुपये की एफडीआर में से 1.77 लाख रुपये वापस नहीं मिलने के मामले में शिकायत को जिला उपभोक्ता विवाद निवारण आयोग ने खारिज कर दिया। आयोग ने माना कि शिकायत की सुनवाई उसके आर्थिक अधिकार क्षेत्र में नहीं आती। शिकायतकर्ता को सक्षम न्यायिक मंच के समक्ष मामला उठाने की छूट दी।
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मामला शहीद लाल सिंह मेमोरियल एजुकेशन सोसायटी बनाम पिरामल कैपिटल एंड हाउसिंग फाइनेंस का है। शिकायत 27 अप्रैल 2023 को दाखिल की गई थी। आयोग के अध्यक्ष जसवंत सिंह तथा सदस्य नीरू अग्रवाल और सरजीत कौर की पीठ ने 23 जुलाई 2026 को फैसला सुनाया।

आ आयोग ने सबसे पहले यह तय किया कि उसके पास शिकायत सुनने का आर्थिक अधिकार है या नहीं। इसके लिए संबंधित सेवा के लिए भुगतान की गई राशि को देखा जाता है। आयोग ने माना कि शिकायतकर्ता ने भले ही केवल 1,77,033 रुपये की एफडीआर राशि वापस मांगी हो लेकिन संबंधित सेवा के तहत उसने 80.50 लाख रुपये का लोन लिया था। यह राशि जिला आयोग के निर्धारित आर्थिक अधिकार क्षेत्र से अधिक है।
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आयोग के फैसले के अनुसार, शिकायतकर्ता की याचिका में बताया गया था कि वर्ष 2017 में डीएचएफएल के प्रतिनिधि ने सोसायटी को एसएमई लोन की पेशकश की थी। प्रतिनिधि ने लोन समय से पहले चुकाने पर प्री-पेमेंट या फोरक्लोजर चार्ज नहीं लेने की बात कही थी। इसके लिए दो माह की ईएमआई के बराबर एफडीआर जमा कराने के लिए कहा था। सोसायटी ने 2,42,788 रुपये की एफडीआर जमा कराई। इसके बाद 26 सितंबर 2017 को 13.5 प्रतिशत वार्षिक ब्याज की दर से 120 माह के लिए 80.50 लाख रुपये का लोन मंजूर हुआ। इसकी मासिक ईएमआई 1,21,394 रुपये थी। रिकॉर्ड के अनुसार एफडीआर पर 8.25 प्रतिशत वार्षिक ब्याज निर्धारित था और इसकी मैच्योरिटी राशि 5,44,913 रुपये बताई गई थी। इसकी मैच्योरिटी तारीख 3 अक्तूबर 2027 थी।

ऋण चुकाने बाद शुरू हुआ विवाद

शिकायतकर्ता के अनुसार, जुलाई 2022 में सोसायटी ने लोन का पूरा बकाया चुकाने के लिए कंपनी से संपर्क किया। अगस्त 2022 में जारी फोरक्लोजर पत्र में कुछ शुल्क लगाए गए। सोसायटी ने एफडीआर की राशि और ब्याज को समायोजित करने की मांग की। आरोप है कि कंपनी ने एफडीआर के बदले केवल 65,755 रुपये दिए और 1,77,033 रुपये रोक लिए। सोसायटी ने इसे सेवा में कमी और अनुचित व्यापार व्यवहार बताते हुए 1,77,033 रुपये 8.25 प्रतिशत वार्षिक ब्याज सहित वापस दिलाने की मांग की। इसके अलावा मानसिक परेशानी के लिए 50 हजार रुपये और मुकदमे के खर्च के रूप में 21 हजार रुपये मुआवजा मांगा गया।

कंपनी ने दिया समाधान योजना का हवाला

पिरामल कैपिटल एंड हाउसिंग फाइनेंस ने शिकायत का विरोध करते हुए कहा कि डीएचएफएल वर्ष 2021 में एनसीएलटी की प्रक्रिया के अधीन था। कंपनी के अनुसार समाधान योजना के तहत एफडीआर धारकों की कुल दावेदारी के मुकाबले उपलब्ध परिसंपत्तियों के आधार पर 23.08 प्रतिशत राशि ही देय थी। इसी आधार पर कंपनी ने 65,756 रुपये का भुगतान किए जाने की बात कही। शेष राशि देने से इनकार किया।

-वर्ष 2021 में आई थी समाधान योजना : वर्ष 2021 में नेशनल कंपनी लॉ ट्रिब्यूनल (एनसीएलटी) ने दीवान हाउसिंग फाइनेंस कॉर्पोरेशन लिमिटेड (डीएचएफएल) के दिवालियापन मामले में पिरामल ग्रुप के 34,250 करोड़ रुपये के समाधान प्रस्ताव को मंजूरी दी थी। इसके तहत एफडीआर धारकों को उनके कुल दावों का केवल 23.08 प्रतिशत हिस्सा ही नियमों के अनुसार मिला। समाधान योजना लागू होने के बाद बाकी बची हुई राशि का भुगतान करने का कोई प्रावधान नहीं बचा।
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