तीन महीने बाद थी शादी, बेटे ने देश के लिए दी कुर्बानी
- शहीद प्रवेश के नाम पर खुली लाइब्रेरी में खुल गया आंगनबाड़ी केंद्र
प्रवीण कुमार
इंद्री। कारगिल युद्ध में महज 21 वर्ष की अवस्था में शहीद हुए मुखाला गांव के प्रवेश कुमार के विवाह को तीन माह ही बाकी थे, लेकिन होनी को कुछ और ही मंजूर था। उन्होंने देश की रक्षा के लिए प्राणों की कुर्बानी दे दी। परिवार के लोग शादी की तैयारी में लगे थे, इधर उनके शहीद होने की खबर मिलते ही खुशी का मौका गम में बदल गया।
देश के लिए शहादत देने वाले प्रवेश अकेले वीर नहीं हैं, उनके दादा महावीर सिंह ने भी फौज में देश की रक्षा के लिए अपने प्राणों की आहुतियां दी थी। दादा महावीर सिंह 1971 की लड़ाई में शहीद हुए थे। परिवार को उनका पार्थिव शरीर तक नहीं मिला था। दादा से ही प्रेरणा लेकर प्रवेश सेना में गए थे। छह फरवरी 1978 को जन्मे प्रवेश कुमार 10वीं कक्षा उत्तीर्ण करते ही सेना में भर्ती हो गए थे।
प्रवेश कुमार ने छह जून 1999 को देश के लिए अपनी जान दे दी। सरकार ने परिवार को गैस एजेंसी, करनाल बस स्टैंड पर दुकान, गांव में पुस्तकालय व शहीद प्रवेश के नाम पर सड़क बनाने की घोषणा की थी। लेकिन 23 वर्ष बीत जाने के बाद भी उनके परिवार को दुकान हीं मिल सकी है। उनके नाम पर सरकार ने गांव में एक लाइब्रेरी खोली, लेकिन किताबें भेजना भूल गए। अब लाइब्रेरी में आंगनबाड़ी केंद्र चल रहा है। उनके भाई संजय कुमार के मुताबिक सरकार ने घोषणा अनुसार निसिंग में गैस एजेंसी दी, जिस कारण उन्हें अपना गांव छोड़ निसिंग जाना पड़ा। खेतीबाड़ी भी छूट गई। दुकान देने की घोषणा आज तक पूरी नहीं हुई। संवाद