जिले के लोग सहकारी बैंक में लेनदेन साफ सुथरा नहीं कर रहे हैं, जबकि यह
बैंक हर वर्ग के लोगों के लिए खास है। इसमें सरकार की स्कीमों सहित ब्याज
दर अन्य बैंकों से कम है।
यदि ग्राहक छमाही या साल में पूंजी का ब्याज ही
जमा करवाते रहे तो उसका रिकॉर्ड बैंक में अच्छा माना जाता है, लेकिन लोग
बैंक से रुपये लेकर देने का नाम नहीं लेते। इस कारण 38 हजार 105 ग्राहकों
के 362 करोड़ 76 लाख रुपये खड़े हैं।
इस रकम की रिकवरी करने में अधिकारी
एड़ी चोटी का जोर लगा रहे हैं। बावजूद इसके लोग पैसे देने को तैयार नहीं
हैं। करोड़ों रुपये की रकम जब आती नहीं दिख रही है तो ग्राहकों को लुभावने
के लिए बैंक द्वारा स्कीम लांच की है। मूल पूंजी पर बैंक का 12 प्रतिशत
ब्याज लेता है।
सरकार ने पांच प्रतिशत ब्याज माफ कर दिया और सात प्रतिशत के
हिसाब से खाता क्लीयर करने को कहा। इसके बाद भी लोग जब नहीं आए तो अब तीन
प्रतिशत और ब्याज माफ कर दिया है। अब खाताधारकों को बैंक की रकम लौटाने पर
मात्र चार प्रतिशत ही ब्याज लिया जा रहा है।
इस स्कीम की अवधि 30 जून तक
निर्धारित की है। बैंक अधिकारियों ने बताया कि बैंक द्वारा 269 करोड़ 66
लाख रुपये असल पूंजी है और 93 करोड़ 10 लाख रुपये ब्याज के तौर पर बन गए
हैं। इस पूंजी को निकालने में कर्मचारियों की संख्या कम है। इस कारण वे
फील्ड में सख्ती नहीं दिखा पाते। यदि फील्ड में जाते हैं तो ऑफिस के काम
प्रभावित हो जाते हैं।
बारह शाखाएं शिफ्ट करने की हालत में
सहकारी
बैंक में वर्ष 1992 के बाद रेगुलर सहित डीसी रेट पर भी कर्मचारी नहीं लगाए
गए हैं। वर्ष 1992 में जिले में 28 शाखाओं पर 500 कर्मचारी होते थे। अब
ग्राहक सहित कागजी कार्रवाई का काम बढ़ गया है और शाखाएं भी 46 तक पहुंच गई
हैं, लेकिन कर्मचारी 190 रह गए हैं। गांव अरड़ाना, मूंड, पोपड़ा, चोचड़ा,
बड़सत, सालवन, ढाकवाला सहित 12 शाखाओं पर मात्र दो-दो कर्मचारी रह गए हैं।
इनको अन्य शाखाओं में शिफ्ट करने के लिए बैंक यूनियनों के पदाधिकारी पत्र
के माध्यम से मांग कर चुके हैं।
बाप, दादा ने लिया लोन नहीं करते चुकता
सहकारी
बैंक से लोगों ने दुकान खोलने, मकान बनाने, कृषि आदि पर लोन लिया है।
सैकड़ों ग्राहक ऐसे हैं जिनके बाप, दादाओं ने लोन लिया था। अब वह रकम मूल
पूंजी से दो गुणा से भी अधिक हो चुकी है। जिसको अगली पीढ़ी चुकता नहीं कर
रही है। यदि अधिकारी सख्ती बरतते हैं तो लोग नेताओं के अधिकारियों को फोन
करवाकर बैंक की सख्त कार्रवाई से बच निकलते हैं।