इंसाफ के इंतजार में सामूहिक दुष्कर्म पीड़िता ने बीते रोज फंदे से लटककर जान दे दी, लेकिन दो साल बाद भी तीन आरोपी फरार हैं। यही नहीं पीड़िता के परिजनों को लगातार धमकी मिल रही है। सहमे परिजन बार-बार घर बदलने को मजबूर हैं, लेकिन पुलिस की ओर से कार्रवाई नहीं की जा रही है। ऐसे में पुलिस की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े हो रहे हैं। गमगीन माहौल में शनिवार को किशोरी का परिजनों ने अंतिम संस्कार कर दिया, लेकिन उन्हें न्याय का इंतजार है। उनका कहना है कि एसपी से मिलकर वे इंसाफ की गुहार लगाएंगे।
दो साल पहले हुए सामूहिक दुष्कर्म के बाद ही किशोरी ने फंदा लगाकर जान देने की कोशिश की थी, लेकिन परिजनों ने उसे समझा बुझाकर मना लिया। इसके बाद से ही वह मानसिक रूप से परेशान रहने लगी। वहीं किशोरी के आत्मघाती कदम के बाद पुलिस ने केस तो दर्ज कर लिया, लेकिन आज तक आरोपियों की गिरफ्तारी नहीं हो सकी है। चार में से सिर्फ एक ही आरोपी गिरफ्तार है, जबकि तीन आज भी फरार हैं। परिजनों की ओर से पुलिस को शिकायत देने के बाद भी उनकी सुरक्षा के लिए कोई प्रयास नहीं किया गया, जबकि आरोपियों के डर से पीड़िता के परिजन बार-बार घर बदलते रहे। तंग आकर शुक्रवार को किशोरी ने फंदा लगाकर जान दे दी। किशोरी का अंतिम संस्कार करनाल के जुंडला गेट के शिवपुरी पर हुआ। इस दौरान परिजनों का कहना था कि उन्हें इंसाफ नहीं मिला है। उनकी बच्ची के साथ सामूहिक दुष्कर्म हुए दो साल बीत गए हैं लेकिन पुलिस ने एक ही आरोपी को गिरफ्तार किया हुआ है। वह अक्सर कहती थी कि उसे इंसाफ मिलेगा या नहीं। इसी परेशानी के चलते उनकी बेटी ने जान दे दी।
यह है मामला-
10 दिसंबर 2019 को किशोरी के परिजनों ने सिटी थाना पुलिस को शिकायत दी थी कि उनकी बेटी पांचवीं कक्षा में पढ़ती है और चार युवकों के उनकी बेटी के साथ सामूहिक दुष्कर्म किया। इसी के चलते उनकी बेटी ने 9 दिसंबर 2019 को फंदा लगाकर जान देने की भी कोशिश की थी। इन आरोपियों ने घर में घुसकर 25 सितंबर 2019 को वारदात को अंजाम दिया था, लेकिन इस मामले में पुलिस ने एक ही आरोपी को गिरफ्तार किया। अन्य तीन आरोपियों को छोड़ दिया। इसी कारण उनकी बेटी परेशान थी। परिजनों को कहना है कि इस मामले की जांच के लिए वे दोबारा एसपी से जल्द ही मिलेंगे।
वर्जन
किशोरी के साथ दुष्कर्म का मामला दिसंबर 2019 को है। परिजनों ने चार के खिलाफ मामला दर्ज कराया था। इस मामले की जांच महिला डीएसपी की अध्यक्षता में एसआईटी द्वारा की गई थी। फरवरी 2020 में चालान दिया गया था। एक आरोपी को गिरफ्तार किया गया था। बाकि तीन आरोपी पुलिस की जांच में बेगुनाह पाए गए थे। -मुकेश कुमार, डीएसपी करनाल।