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Karnal News: हनुमान जी के स्वरूपों ने की शहर की परिक्रमा

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- पाकिस्तान से आए हिंदू युवा आज भी निभाते हैं प्राचीन परंपरा
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संवाद न्यूज एजेंसी

करनाल। देश को मिली आजादी के बाद हुए विभाजन के दौरान पाकिस्तानी क्षेत्र से आए लोग अपनी परंपरा वर्षों बाद भी निभा रहे हैं। इसी के तहत शहर में वीरवार को हनुमान जी के स्वरूप निकाले और परिक्रमा की।
बता दें कि दशहरा पर्व पर बजरंग बली के स्वरूपों के पूजन की परंपरा पाकिस्तान के हिंदुओं में थी। इसके तहत वह भगवान हनुमान जी के स्वरूप निकालते थे। ये परंपरा पाकिस्तान से आए हिंदू परिवार आज भी निभाते हैं। मौजूदा समय में करनाल की कुल नौ सभाओं की ओर से भगवान हनुमान जी के चलिया व्रत के नियम का पालन किया जाता है। दशहरा पर्व पर इन सभाओं के सदस्यों की ओर से हनुमान जी के स्वरूप धारण कर घरों में परिक्रमा कर आशीर्वाद दिया जाता है।
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करनाल शहर में भी इसे कई साल पहले शुरू किया गया था। इसी परंपरा के तहत वीरवार को शहर के रामनगर, सदर बाजार, मोती नगर व शुगर मिल के पास रह रहे लोगों के घर में जाकर हनुमान जी के स्वरूपों ने परिक्रमा की।
इस दिन का हनुमान जी के भक्तों को बेसब्री से इंतजार रहता है क्योंकि इन चार दिनों में हनुमान जी के स्वरूप शहर में परिक्रमा करते हैं और उन भक्तों के घर जाते हैं जो उनको बुलाते हैं। महावीर सेवादल के सेवक मांशु ने बताया कि परंपरा के अनुसार हनुमान जी से मन्नतें मांगते हुए दशहरा से पहले 40 दिन का व्रत करते हैं। वह इन 40 दिनों तक एक समय भोजन कर नंगे पांव रहते हैं और हनुमान जी के दरबार में ही सोते हैं। इस दौरान पूजा के समय व्रत रखने वाले बच्चे सिर पर हनुमान जी का विशेष स्वरूप रखते हुए उनका रूप ग्रहण करते हैं। लोग अपने घरों एवं प्रतिष्ठानों में हनुमान जी के स्वरूप को आमंत्रित कर उनकी पूजा करते हैं। दशहरा के दिन शहर की परिक्रमा पूरी करने के बाद ही यह व्रत पूरा होता है।
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ब्रह्मचर्य का करते हैं पालन



इस यात्रा में सभा के वह युवा हिस्सा लेते हैं जो दशहरे से पहले 41 या 21 दिन तक ब्रह्मचर्य का पालन कर घर और व्यवसाय त्यागकर व्रत रखते हैं। व्रत रखकर एक समय खाना खाते हैं। नंगे पांव घूमते हैं व जमीन पर सोते हैं। शहर में राम नगर, प्रेम नगर, गांधी नगर, शिव कॉलोनी व बांसों गेट स्थित सभाओं की ओर से व्रतधारी युवा हनुमान जी के मुकुट वाला स्वरूप धारण करके शहर में परिक्रमा करते हैं। अंत में रावण के पुतले पर सोठा मारते हैं। जिसके बाद यह प्रक्रिया समाप्त होती है।
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