संवाद न्यूज एजेंसी
करनाल। लोहड़ी सिर्फ एक पर्व नहीं, बल्कि पंजाबी संस्कृति, रिश्तों और खुशियों का उत्सव है। नवविवाहिता की ससुराल में पहली लोहड़ी परिवार के लिए बेहद खास मानी जाती है। नई नवेली बहुएं आधुनिक अंदाज में लोहड़ी मनाती हैं। ऐसे में सास अपने समय की सादगी भरी लोहड़ी को याद कर भावुक हो उठती हैं। इस बार भी पुरानी और आज की लोहड़ी को मनाने के लिए बेहतर संगम देखने को मिलेगा। संवाद
- पूरे परिवार के साथ मनाएंगी
शादी के बाद पहली बार लोहड़ी मना रहीं नवविवाहिता सोनिया की यह पहली लोहड़ी होगी। उन्होंने बताया कि वह उनके मायके से अभी से ही लोहड़ी का सामान आ चुका है। इसके अलावा लोहड़ी के दिन अरदास की जाएगी सुबह के समय और शाम को पूरे परिवार के साथ लोहड़ी जलाई जाएगी। उन्होंने बताया कि वह अपनी पहली लोहड़ी को लेकर काफी उत्साहित है। पहली लोहड़ी पर घर पर पूरे परिवार का खाना किया गया है जिसमें नृत्य गीत सभी शामिल होगा।
- पूरा पिंड मिलता थे इस मौके पर
- सास हरजीत कौर अपने समय की लोहड़ी को याद कर भावुक हो गईं। उन्होंने बताया कि उस समय लोहड़ी को काफी सादगी से मनाया जाता था। मायके से दस दिन पहले ही लोहड़ी का उपहार आ जाता था। उन्होंने बताया कि लोहड़ी के दिन पूरा पिंड एक जगह लोहड़ी को जलाया करता था, जिसमें महिलाएं बोलियां और लोकगीत गाया करती थी। आज महिलाएं बोलियां गाना ही भूल चुकी हैं, जिसमें तेज आवाज में डीजों पर ही त्योहार को मनाना सही समझा जाने लगा है। जहां पहले लोहड़ी सामूहिक रूप से गांव या मोहल्ले में मनाई जाती थी, वहीं अब यह अधिकतर घरों या बैंक्वेट हॉल तक सीमित हो गई है। पहले पकवान घर पर बनाए जाते थे, आज बाजार से रेडीमेड मिठाइयों और गिफ्ट पैक का चलन बढ़ गया है।