संवाद न्यूज एजेंसी
करनाल। धूप की कमी और बढ़ती ठंड का असर हाथों पर पड़ रहा है। खासकर, घरेलू महिलाओं के हाथों की उंगलियों में अकड़न और नीले निशान की शिकायत तेजी से बढ़ रही है। यह समस्या चिलब्लेंस के रूप में सामने आ रही है, जिससे सर्दी के मौसम में रक्त संचार प्रभावित होने के कारण तेज दर्द, सूजन, जलन और लाल त्वचा हो जाती है।
नागरिक अस्पताल की त्वचा रोग ओपीडी में इन दिनों चिलब्लेंस के मरीजों की संख्या लगातार बढ़ रही है। जिला नागरिक अस्पताल के त्वचा रोग विशेषज्ञ डॉ. प्रदीप ने बताया कि रोजाना औसतन 20 से 25 लोग चिलब्लेंस की शिकायत लेकर अस्पताल पहुंच रहे हैं जिनमें 15 के करीब महिलाएं होती हैं। इनमें अधिकांश महिलाएं वे हैं जो रोजाना ठंडे पानी में कपड़े धोने, बर्तन साफ करने और लंबे समय तक गीले हाथों से काम करती हैं।
ठंड में नसें सिकुड़ने से बढ़ रही परेशानी
डॉ. प्रदीप के अनुसार, सर्द मौसम में हाथ-पैरों की छोटी रक्त नलिकाएं सिकुड़ रही हैं। इससे खून का प्रवाह ठीक से नहीं हो पाता और त्वचा को पर्याप्त ऑक्सीजन नहीं मिलती। इस कारण हाथों में सूजन, खुजली, जलन और दर्द की समस्या होती है। कई मामलों में त्वचा फट जाती है और जख्म बनने लगते हैं, जिससे संक्रमण का खतरा बढ़ जाता है। महिलाएं पुरुषों की तुलना में ठंडे पानी के सीधे संपर्क में ज्यादा रहती हैं। इसके अलावा, खून की कमी, कम बीपी, थायरॉइड की समस्या और कमजोर इम्यूनिटी भी चिलब्लेंस के खतरे को बढ़ा देती है। ग्रामीण इलाकों में ठंड से बचाव के संसाधन सीमित होने के कारण समस्या और गंभीर हो जाती है। इसलिए गांव से अधिक मरीज आ रहे हैं।
बार-बार होने पर अल्सर का खतरा
डॉ. प्रदीप ने बताया कि शुरुआती लक्षणों को नजरअंदाज करना नुकसानदायक हो सकता है। अगर समय पर इलाज न मिले तो चिलब्लेंस बार-बार होने लगती है और त्वचा स्थायी रूप से संवेदनशील हो सकती है। कुछ मामलों में यह दर्दनाक अल्सर का रूप भी ले लेती है।
बचाव के उपाय-
ठंडे पानी के इस्तेमाल से बचें।
हाथों को लंबे समय तक गीला न रखें।
बर्तन धोते समय दस्ताने पहनें।
बाहर निकलते समय ऊन या रबर के दस्ताने पहनें।
दिन में 2-3 बार मॉइस्चराइजिंग क्रीम लगाएं।
शरीर में खून की कमी हो तो जांच कराएं।
ज्यादा दर्द, या घाव होने पर डॉक्टर से संपर्क करें।