करनाल के दयाल सिंह कॉलेज के विद्यार्थियों ने रोल नंबर नहीं मिलने के विरोध में प्रबंधन के खिलाफ जमकर नारेबाजी कर हंगामा किया।
विद्यार्थियों ने कॉलेज प्रबंधन पर विद्यार्थियों को नाजायज रूप से तंग करने और रोल नंबर देने के नाम पर जुर्माने के तौर पर पैसा मांगने का आरोप लगाया। शुक्रवार को कॉलेज के बीए, बीकॉम और बीएससी के छात्र काफी संख्या में कॉलेज के प्रमुख गेट के सामने एकत्रित हो गए।
विद्यार्थियों ने कॉलेज प्रबंधन के खिलाफ जमकर नारेबाजी की। विद्यार्थियों में शामिल विकास, रामचंद्र, देवेंद्र चौहान, अंकुश, सुल्तान, प्रिंस मराठा, जोनी, सुमित, गुरमीत, अमित, सत्यवान व कमल सहित अन्य ने आरोप लगाया कि लेक्चर शॉट होने पर उन लोगों के नाम काट दिए गए थे।
उन लोगों ने नियम के अनुसार पांच सौ रुपये अदा कर दोबारा प्रवेश लिया। अब कॉलेज प्रबंधन लेक्चर शॉट होने के नाम पर जुर्माना वसूलने का दबाव बना रहा है, जो विद्यार्थियों पर सरासर ज्यादती है। उन लोगों ने जब दोबारा एडमिशन लिया है तो फिर जुर्माना किस बात का दें।
विद्यार्थियों का आरोप है कि री-एडमिशन के नाम पर प्रबंधन की ओर से पांच सौ रुपये के लिए दी गई रसीद भी साइंस फंड की काटी है, जो प्रवेश के नाम पर होनी चाहिए थी। इससे साफ है कि कॉलेज में विद्यार्थियों से लूट की जा रही है। काफी जद्दोजहद के बाद कुछ विद्यार्थियों को रोल नंबर दिए गए हैं तो कुछ नहीं दिए गए। परीक्षा शनिवार से प्रारंभ होनी है।
विद्यार्थियों के कल्याण पर खर्च होगा यह पैसा
कॉलेज में पूरा काम नियम के अनुसार किया जा रहा है। विश्वविद्यालय की ओर से वीरवार को ही रोल नंबर मिले हैं। कॉलेज प्रबंधन ने उसे पूरी तरह सूचीबद्ध किया है।
विद्यार्थियों को रोल नंबर दिए जा रहे हैं। साइंस फंड का पैसा भी विद्यार्थियों के कल्याण पर ही खर्च किया जाना है।
राकेश भारद्वाज, प्रिंसिपल, दयाल सिंह कॉलेज
प्लॉटधारकों ने बीडीपीओ कार्यालय में काटा बवाल
जुंडला के गांव सिंघड़ा के सैकड़ों ग्रामीणों ने प्लॉटों के लिए निसिंग के खंड विकास एवं पंचायत अधिकारी के कार्यालय में पहुंचकर बवाल काटते हुए जोरदार नारेबाजी की।
प्रदर्शन में काफी संख्या में महिलाएं शामिल थीं। बीडीपीओ ने मौके पर पहुंचकर ग्रामीणों की समस्या का हल करने का आश्वासन देकर प्रदर्शनकारियों को शांत किया। प्लॉटों के मामले में खफा प्रदर्शनकारियों में शामिल लोगों ने बीडीपीओ राजबीर खुंडिया को उनकी गाड़ी से उतरकर कार्यालय की ओर जाते हुए रोक लिया।
महिलाओं ने उन्हें घेर लिया और उन पर न्याय नहीं दिलवाने के ताबड़तोड़ सवालों की बौछार लगा दी। बीडीपीओ ने नाराज महिलाओं को न्याय दिलवाने का आश्वासन देकर अपना पीछा छुड़वाया। प्लॉटधारकों ने साफ तौर पर चेतावनी दी कि अगर उन्हें इंसाफ नहीं मिला तो आंदोलन तेज करेंगे।
ग्रामीणों ने आरोप लगाया कि ग्राम पंचायत सिंघड़ा की ओर से महात्मा गांधी ग्रामीण बस्ती योजना के तहत उन्हें 100-100 गज के तीन सौ प्लॉट वर्ष 2011 में दिए गए थे। इन प्लॉटों पर कब्जा भी मिल गया था लेकिन गांव के कुछ लोगों ने कई दिन पूर्व इन प्लॉटों में मनरेगा के तहत बनाई गई सड़कों व मकानों के लिए बनाई गई नीवों को उखाड़ दिया, जिसको लेकर उनमें रोष है।
सरपंच संजय कुमार ने विकास विभाग के अधिकारियों पर मिलीभगत का आरोप लगाते हुए कहा कि इस वजह से गरीब लोगों को न्याय नहीं मिल पा रहा है। जब न्याय मांगने के लिए पुलिस के पास जाते हैं तो पुलिस विकास विभाग के अधिकारियों का मामला बताकर टाल देती है। उधर, विकास विभाग के अधिकारी कानून व्यवस्था का मामला बता रहे हैं।
इससे खफा प्लॉट धारकों ने खंड कार्यालय में एकत्रित होकर मोर्चा खोल दिया। सूचना मिलते ही बीडीपीओ राजबीर खुंडिया ने कार्यालय में पहुंचकर प्लॉट धारकों की बात सुनकर उन्हें शांत किया। बीडीपीओ ने बताया कि इस मामले में पुलिस की मदद ली जा रही है और जल्द ही कानूनी राय लेने के बाद समाधान कर दिया जाएगा।
मौके पर तारो देवी, बिमला देवी, सरबती, वीना रानी, माया देवी, सुदेश, बिंदी, सोमती, करेशनी, सोमिया, नूर निशा, सूरजभान, चेतराम, रामसिंह, बबनदास, सुभाषचंद, बलराम, लालदास, पूर्णचंद, ज्ञानचंद, अमरा राम, उदयभान, बलराज, नरेश, रणजीत सिंह, हरिसिंह, गुलाब सिंह, सेवक राम मौजूद थे।