माई सिटी रिपोर्टर
करनाल/घरौंडा। मुंडोगढ़ी गांव में चार एकड़ जमीन पर हुआ विवाद में करीब छह माह से तनातनी थी। दोनों पक्षों में अपने स्तर पर कई बार पंचायतें हुईं। हर बार समझाैता होता और कुछ दिनों बाद फिर विवाद हो जाता। बुधवार की शाम को भी पंचायत हुई थी लेकिन वीरवार को जब दोनों पक्ष खेत पर पहुंचे तो समाधान के बजाय विवाद ने खूनी संघर्ष का रूप ले लिया।
वारदात के दूसरे दिन शुक्रवार को गांव की गलियों में सन्नाटा पसरा रहा। तनाव का माहौल होने के बाद भी दोपहर के समय गांव में न पुलिस की तैनाती दिखी न ही आरोपी व दोनों पक्षों के लोग दिखे। इससे ग्रामीणों में असुरक्षा की भावना और बढ़ गई है। आम दिनों में चहल-पहल से भरा रहने वाला गांव खामोशी की चादर ओढ़े हुए है। लोग घरों से बाहर निकलने में भी हिचकिचा रहे हैं।
दुकानों के शटर आधे खुले हैं और अंदर बैठे लोग धीमी आवाज में इस घटना की चर्चा कर रहे हैं। गमगीन माहौल में हर कोई घटना को लेकर चिंतित है। ग्रामीणों का कहना है कि अगर समय रहते प्रशासन ने ध्यान दिया होता और विवाद का स्थायी समाधान निकाला होता तो शायद यह स्थिति पैदा नहीं होती।
दोनों घरों में विलाप कर रहीं महिलाएं
गमगीन माहाैल में दोनों के घरों में महिलाएं विलाप कर रही हैं। अब दोनों परिवारों की गांव में महिलाएं ही हैं या फिर रिश्तेदार पहुंचे हुए हैं। परिवार के पुरुष घरों पर नहीं हैं। घराैंडा थाना प्रभारी इंद्र सिंह का कहना है कि दोनों पक्षों के आरोपियों की गिरफ्तारी के लिए गांव से अलग ठिकानों पर दबिश दी जा रही है। पुलिस इनपुट पर काम कर रही है।
ग्रामीण बोले, दोनों ही पक्ष बड़े किसान
ग्रामीणों का कहना है कि दोनों ही पक्ष गांव के बड़े किसान हैं। पिछले छह माह से विवाद चल रहा था। वीरवार को दो लोगों की हत्या के बाद से दोनों पक्षों के कई लोग तो घायल हैं, जोकि अस्पताल में दाखिल हैं। कुछ लोगों को पुलिस ने हिरासत में लिया हुआ है। वीरवार रात को दोनों मृतकों के शवों को दफनाने के दौरान परिवार के लोग पुलिस के साथ गांव पहुंचे थे। इसके बाद पुलिस ने हिरासत में ले लिए गए। अन्य लोग घरों पर नहीं हैं।
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खेत जोतने पर हो गया विवाद
पुलिस के अनुसार, अलीशान ने सदरपुर गांव की एक जगह दो और दूसरी जगह तीन एकड़ जमीन हासिम पुत्र लीला से खरीदी थी। इस जमीन के साथ लगती दो एकड़ जमीन उन्होंने अर्जुन कादियान निवासी करनाल से खरीदी थी। अलीशान पक्ष का दो साल से जमीन पर कब्जा था, ट्यूबवेल भी लगा है। इस जमीन को लेकर 25 मार्च को दूसरे पक्ष यानी अलीशान के भाई सुलेमान व शेरदीन, सबीरा और इलताफ आदि के साथ पंचायती तौर पर बात हुई थी। दोनों पक्षों ने वीरवार को सुबह 9 बजे कागजात लेकर पहुंचना था लेकिन दूसरे पक्ष के काफी संख्या में लोग कागजात लेकर आने की बजाए 8:30 बजे पहुंचकर जमीन जोतने लगे तो सूचना पर अलीशान पक्ष के लोग पहुंच गए। विवाद के बाद दोनों पक्षों ने एक-दूसरे पर लाठी-डंडों से हमला कर दिया। हमले में 10 के करीब लोग घायल हो गए। साबीरा और वाहिद की मौत हो गई थी।