संवाद न्यूज एजेंसी
करनाल। राजकीय सीबीएसई विद्यालयों में कार्यरत शिक्षकों के लिए राहतभरी खबर है। अब अनिवार्य सीपीडी यानी कंटिन्यू प्रोफेशनल डेवलपमेंट प्रशिक्षण के लिए शिक्षकों को पैसे खर्च नहीं करने पड़ेंगे। शिक्षा विभाग प्रशिक्षण का पूरा वित्तीय भार उठाएगा।
सीबीएसई से मान्यता प्राप्त स्कूलों में शिक्षकों के लिए हर वर्ष 50 घंटे का प्रशिक्षण अनिवार्य है। इसमें 25 घंटे का प्रशिक्षण अपने विद्यालय में और 25 घंटे दूसरे विद्यालय में लेना होता है। शिक्षकों को लगभग 10 दिन तक प्रशिक्षण में भाग लेना पड़ता है। प्रत्येक दिन की फीस 700 रुपये निर्धारित थी।
इस प्रकार एक शिक्षक को सालाना करीब 7 हजार रुपये खर्च करने पड़ते थे। कई बार प्रशिक्षण दूसरे जिलों में आयोजित होने के कारण शिक्षकों को यात्रा व्यय भी स्वयं वहन करना पड़ता था।
प्रशिक्षण शुल्क के मजबूर नहीं कर सकेगा स्कूल
अब यह बाध्यता समाप्त हो जाएगी। कोई भी स्कूल प्रबंधन शिक्षकों को अपने खर्च पर प्रशिक्षण लेने के लिए मजबूर नहीं कर सकेगा। प्रशिक्षण की संपूर्ण व्यवस्था अब विद्यालय अथवा विभागीय स्तर पर करवाई जाएगी। नई व्यवस्था के तहत विभाग स्वयं वार्षिक प्रशिक्षण कैलेंडर तैयार करेगा। शैक्षणिक सत्र 2026-27 के लिए विषय-विशेष, कक्षा-स्तर और कौशल-आधारित मॉड्यूल शामिल किए जाएंगे। प्रशिक्षण कार्यक्रम चरणबद्ध तरीके से संचालित होंगे, जिससे गुणवत्ता और पारदर्शिता सुनिश्चित की जा सके।
एनईपी के अनुरूप लागू होगी नीति
यह पूरी प्रक्रिया सीबीएसई के सीपीडी मानकों और राष्ट्रीय शिक्षा नीति के अनुरूप लागू की जाएगी। जिला शिक्षा अधिकारियों को निर्देश दिए गए हैं कि वे अपने-अपने क्षेत्रों में नई व्यवस्था का सख्ती से पालन सुनिश्चित करें। यदि किसी विद्यालय द्वारा नियमों की अनदेखी की जाती है तो संबंधित प्रबंधन के विरुद्ध नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी।
वर्जन-
व्यवस्था लागू होने से प्रशिक्षण प्रक्रिया में गुणवत्ता नियंत्रण और पारदर्शिता दोनों को मजबूती मिलेगी। यह शिक्षा विभाग की सकारात्मक पहल है। - रोहतास वर्मा, जिला शिक्षा अधिकारी