माई सिटी रिपोर्टर
करनाल। संपत्ति कर की वसूली, सरकारी ग्रांट, सेस और ड्यूटी समेत अपनी संपत्तियों (दुकानों) की नीलामी कर निगम पिछले निर्धारित बजट से 51 करोड़ रुपये अधिक कमाएगा। खर्च की बात करें तो विकास कार्याें पर पिछले बजट की तुलना में 156 करोड़ रुपये अतिरिक्त खर्च किए जाएंगे। निगम की बजट 2026-27 की बैठक में यह निर्णय लिया गया।
सोमवार को हुई बैठक में मेयर रेणू बाला गुप्ता ने बताया कि निगम ने इस बार आय 350 करोड़ रुपये तक पहुंचाने और 347 करोड़ रुपये खर्च करने का लक्ष्य रखा है। खर्च के बाद भी मार्च, 2027 तक करीब 302 करोड़ रुपये का क्लोजिंग बैलेंस रखने की योजना है। निगम के इस बजट को विकास और वित्तीय संतुलन दोनों के लिहाज से अहम माना जा रहा है। पिछले वर्षों के अनुभवों को देखते हुए इस बार आय बढ़ाने और खर्च को योजनाबद्ध तरीके से लागू करने पर जोर दिया जाएगा।
मेयर ने कहा कि अगले बजट में प्री-बजट बैठक वार्ड स्तर पर आयोजित की जाएगी, ताकि बजट निर्माण में आम जनता और वार्ड समितियों के सुझावों को भी शामिल किया जा सके। बैठक में विधायक जगमोहन आनंद, निगम आयुक्त डॉ. वैशाली शर्मा, सांसद प्रतिनिधि कविन्द्र राणा, 20 वार्डों के निगम पार्षद मौजूद रहे।
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- ऐसे बढ़ेगी आय : निगम सदन ने पिछले वित्तीय वर्ष में कर वसूली के लक्ष्य को बढ़ाकर 33.70 करोड़ से 39 करोड़ रुपये कर दिया है। सेस और ड्यूटी से आय को 35.11 करोड़ से बढ़कार 51.51 करोड़ किया गया है। दुकानों और प्लॉटों की नीलामी से 32.23 करोड़ रुपये की आमदनी का लक्ष्य है। राज्य सरकार से भी निगम को इस बार पहले की तुलना में 13 करोड़ रुपये ज्यादा मिलेंगे जबकि केंद्र सरकार की ओर से 21.22 करोड़ रुपये ज्यादा की ग्रांट मिलेगी।
पिछले साल के लक्ष्य पूरे नहीं : नगर निगम ने पिछले वित्तीय वर्ष 2025-26 में 312 करोड़ रुपये आय का लक्ष्य रखा था। वास्तविकता में निगम केवल 299 करोड़ रुपये ही जुटा पाया। खर्च के मामले में भी लक्ष्य पूरा नहीं हो पाया था। 394 करोड़ रुपये का लक्ष्य था लेकिन निगम केवल 191 करोड़ रुपये ही खर्च कर पाया। तय लक्ष्य का आधा भी खर्च नहीं हो सका था।
विकास कार्यों को बढ़ाया जाएगा
सड़कों का निर्माण, स्ट्रीट लाइट, सीवरेज, पेयजल व्यवस्था, पार्कों का विकास और अन्य नागरिक सुविधाओं पर खर्च बढ़ाया जाएगा। अधूरे प्रोजेक्ट्स को पूरा करने और नई योजनाओं को शुरू करने के लिए भी बजट में प्रावधान किया गया है। दावा है कि खर्च की गति को तेज किया जाएगा ताकि पिछले साल जैसी स्थिति न बने।
302 करोड़ का क्लोजिंग बैलेंस : वित्तीय संतुलन का दावा
बजट में यह भी प्रावधान किया गया है कि सभी खर्चों के बाद 31 मार्च, 2027 तक करीब 302 करोड़ रुपये का क्लोजिंग बैलेंस रहेगा। निगम इसे अपनी वित्तीय मजबूती का संकेत मान रहा है। निगम सदन में बजट को सर्वसम्मति से पास कर दिया गया लेकिन असली परीक्षा अब इसके क्रियान्वयन की होगी।