माई सिटी रिपोर्टर
करनाल। शहर में दिव्य नगर योजना के बड़े प्रोजेक्ट अभी शुरू नहीं हुए थे कि सरकार ने सख्त शर्तें लागू कर दी हैं। इनके तहत हर प्रोजेक्ट की डीपीआर अनिवार्य रहेगी। बिना डीपीआर बजट जारी नहीं होगा। किसी भी एक प्रोजेक्ट की न्यूनतम खर्च राशि पांच करोड़ रुपये होनी चाहिए। विकास कार्य में 50 प्रतिशत बजट देने वाली सरकार दूसरी किस्त तभी जारी करेगी जब पहली किस्त के 75 प्रतिशत खर्च का सबूत मिलेगा।
नगर निगम आयुक्त हर प्रोजेक्ट की महीने में दो बार समीक्षा और विस्तृत प्रगति रिपोर्ट लेंगे। शहरी स्थानीय निकाय के निदेशक से लेकर मुख्य सचिव तक निगरानी रखेंगे। शहर में दिव्य नगर योजना के तहत 8.5 किलोमीटर लंबाई की 6 सड़कों पर सौंदर्यीकरण शुरू हो चुका है। परियोजना पर करीब 10 करोड़ 42 लाख रुपये की लागत आएगी। शहर के 20 बड़े पार्कों और 16 चौक-चौराहों का सौंदर्यीकरण किया जाएगा। परियोजना पर करीब साढे 9 करोड़ रुपये की लागत आएगी। दोनों काम पर सरकार की नई शर्तें लागू रहेंगी।
बिना डीपीआर नहीं मिलेगा अनुदान
संशोधित नियमों के तहत नगर निगम को अब किसी भी परियोजना के लिए डीपीआर बनाना अनिवार्य होगा। डीपीआर में परियोजना की लागत, तकनीकी स्वरूप, समयसीमा और अपेक्षित लाभ का स्पष्ट विवरण देना होगा। बिना डीपीआर के योजना के तहत किसी भी प्रकार की राशि जारी नहीं की जाएगी।
5 करोड़ रुपये की परियोजना जरूरी
दिव्य नगर योजना में हुए बदलाव के तहत नगर निगमों के लिए न्यूनतम परियोजना लागत 5 करोड़ रुपये तय कर दी गई है। इसका मतलब है कि करनाल नगर निगम अब छोटे और बिखरे हुए कार्यों के बजाय बड़े, प्रभावशाली और दीर्घकालिक विकास प्रोजेक्ट्स ही योजना में शामिल कर सकेगा। इससे शहर के सौंदर्यीकरण, पर्यटन, खेल सुविधाओं, पार्कों और स्मार्ट इंफ्रास्ट्रक्चर से जुड़े बड़े प्रोजेक्ट्स को बढ़ावा मिलने की उम्मीद है।
फंड दो किस्तों में किया जाएगा जारी
नगर निगम को मिलने वाला फंड अब दो किस्तों में जारी किया जाएगा। पहली किस्त के तहत मिली राशि का 75 प्रतिशत खर्च करने के बाद उपयोगिता प्रमाणपत्र जमा कराना अनिवार्य होगा। इसके बाद ही दूसरी किस्त जारी की जाएगी। इस व्यवस्था से फंड के दुरुपयोग और वर्षों तक अधूरे पड़े विकास कार्यों पर अंकुश लगेगा। नगर निगम को परियोजना लागत का 50 प्रतिशत खर्च स्वयं वहन करना होगा जबकि शेष 50 प्रतिशत राज्य सरकार देगी। निगम अपनी हिस्सेदारी जुटाने के लिए बॉन्ड, ऋण या अन्य वैकल्पिक वित्तीय स्रोतों का सहारा भी ले सकेगा।
दिव्य नगर योजना में होने वाले विकास कार्यों की मासिक समीक्षा अनिवार्य रहेगी। निगम आयुक्त की ओर से प्रगति की निगरानी की जाएगी और रिपोर्ट शहरी स्थानीय निकाय निदेशालय को भेजी जाएगी। इसके अलावा विकास कार्यों की गुणवत्ता की जांच भी सरकार के निर्देशानुसार की जाएगी। - रेणु बाला गुप्ता, मेयर, करनाल