संवाद न्यूज एजेंसी
करनाल। जिला उपभोक्ता विवाद निवारण आयोग ने हरियाणा शहरी विकास प्राधिकरण (एचएसवीपी) के खिलाफ दायर शिकायत को खारिज कर दिया। कहा कि नर्सिंग होम के लिए खरीदा गया प्लॉट व्यावसायिक उद्देश्य श्रेणी में आता है। आयोग ने मामले को समय सीमा से बाहर माना। प्लॉट व्यावसायिक उद्देश्य से खरीदा इसलिए शिकायतकर्ता उपभोक्ता की श्रेणी में नहीं आता।
करनाल के सेक्टर-32 निवासी इंद्रजीत और अमरीक सिंह ने आयोग के समक्ष शिकायत रखी थी कि उन्होंने 2025 में पानीपत के सेक्टर 13-17 में एक नर्सिंग होम साइट के लिए 29 लाख 73 हजार 100 रुपये में प्लॉट आवंटित कराया था। आरोप था कि 30.63 लाख से अधिक का भुगतान करने के बावजूद उन्हें कब्जे की लिखित सूचना नहीं दी गई। इसके बाद दबाव में उनसे 10 लाख अतिरिक्त जमा कराए गए। शिकायतकर्ताओं ने 10 लाख रुपये की वापसी और मुआवजे की मांग की थी।
आयोग के अध्यक्ष जसवंत सिंह और सदस्य नीरू अग्रवाल व सर्वजीत कौर की पीठ ने निष्कर्ष निकाला कि शिकायत न तो समय सीमा के भीतर है और न ही आयोग के पास इसे सुनने का क्षेत्राधिकार है। आयोग ने इस शिकायत को बिना किसी खर्च के खारिज कर दिया गया।
दो प्रमुख कानूनी पहलू पर किया गौर
आयोग ने सुनवाई के दौरान दो प्रमुख कानूनी पहलुओं पर गौर किया। आयोग ने तर्क दिया कि उपभोक्ता संरक्षण अधिनियम, 2019 की धारा 2(7) के तहत, अगर कोई सेवा व्यावसायिक लाभ के लिए ली जाती है, तो वह उपभोक्ता की श्रेणी में नहीं आती। आयोग ने पाया कि शिकायतकर्ता यह साबित नहीं कर सके कि वे स्वरोजगार के माध्यम से केवल आजीविका कमाने के लिए नर्सिंग होम खोल रहे थे।
-अधिनियम की धारा 69 के अनुसार शिकायत कारण उत्पन्न होने के दो साल के भीतर दर्ज होनी चाहिए थी। भुगतान 2017 तक किया गया था जिसके आधार पर शिकायत 2019 तक दर्ज होनी चाहिए थी लेकिन शिकायत को दिसंबर, 2021 में दायर किया गया।