इंद्री। उपमंडल के गांव सैयद छपरा में अंजुमन यादगारे हुसैनी की देखरेख में 27 जून से मजलिसों का दौर चल रहा था, इसके रविवार को अंतिम दिन मजलिस के बाद इमाम हुसैन का जुल्जना (घोड़ा) व ताबूत बरामद किया गया। रविवार को मुहर्रम की 10 तारीख का दिन बेहद अहम माना जाता है। इसी दिन इमाम हुसैन ने हक और इंसाफ के लिए अपनी जान कुर्बान कर दी थी। उनकी यह कुर्बानी आज भी इंसानियत, सब्र और ईमानदारी की मिसाल है। मौलाना जिनान असगर देहलवी ने अपनी तकरीर में कहा कि यजीद की सेना ने पानी तक बंद कर दिया था। बच्चे और बूढ़े तीन दिन से प्यासे थे। हजरत अब्बास बहुत बहादुर थे, जिन्होंने पानी लाने के लिए फुरात नदी तक पहुंच बनाई। पानी लेकर लौटते समय जालिमों ने हज़रत अब्बास के दोनों हाथ काट दिए लेकिन उन्होंने मशक को गिरने नहीं दिया। इस मौके पर अंजुमन यादगारें हुसैनी के संयोजक रजा अब्बास, नईम अब्बास, अली अब्बास, अब्बास अली, अली कासिम, हसन अब्बास, वसी हैदर नजम अब्बास, आदि मौजूद रहे। संवाद