माई सिटी रिपोर्टर
करनाल। स्मार्ट सिटी के नाम पर 32 करोड़ रुपये स्ट्रीट लाइटों पर खर्च किए जा चुके हैं लेकिन हकीकत यह है कि शहर की अधिकांश सड़कों और सेक्टरों की गलियों में रात के वक्त अंधेरा छाया रहता है।
न स्ट्रीट लाइटें जलती हैं और न जवाबदेही तय की गई है। रात होते ही सेक्टरों की सड़कें वीरान और असुरक्षित हो जाती हैं। दूसरी ओर शहर की कॉलोनियों के हालत बिल्कुल विपरीत हैं। यहां दिन में तो लाइटें जलती हैं लेकिन रात को बंद हो जाती हैं। कागजों में ही शहर को रोशनी से जगमग दिखाया जा रहा है।
रात के अंधेरे में असामाजिक तत्व सक्रिय हो जाते हैं। चोरी, बाइक स्नेचिंग और नशेड़ियों का जमावड़ा जैसी घटनाएं सामने आ रही हैं। अंधेरे का फायदा उठाकर अपराधियों के हौसले बुलंद हो रहे हैं। जिससे शहरवासियों को आपराधिक घटनाओं का डर सताने लगा है। शिकायत के लिए हेल्पलाइन नंबर और मोबाइल एप की सुविधा जरूर दी गई है लेकिन उस पर अमल नहीं हो रहा।
नागरिकों की शिकायतें दर्ज होती हैं, पर समाधान के नाम पर कुछ नहीं होता। कई लोगों ने बताया कि महीनों पहले शिकायत की थी लेकिन लाइटें आज तक बंद हैं। मुख्य मार्ग से लेकर सेक्टरों तक में अंधेरा : पुराना जीटी रोड, बस अड्डा मार्ग, कर्ण पार्क रोड, मॉडल टाउन, सेक्टर 6, 7, 13, 14, 16, रामनगर और प्रेम नगर जैसे क्षेत्रों में स्ट्रीट लाइटें लंबे समय से बंद पड़ी हैं।
कई जगह लाइटों के खंभे तो खड़े हैं, लेकिन लाइटें नदारद हैं। वहीं शहर की दुर्गा कॉलोनी की गली नंबर 11 में लगातार चार दिनों से लाइटें दिन में भी जल रही हैं। जबकि बाकी लाइटें खराब हैं।