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Karnal News: कम पशुओं में अधिक दुग्ध उत्पादन की चुनौती, शोध शुरू

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विश्व दुग्ध दिवस
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- भारत में सबसे तेज 5.7 प्रतिशत की वार्षिक वृद्धि के साथ बढ़ रहा दुग्ध उत्पादन
- सेक्स सॉर्टिंग, जीनोम एडिटिंग तकनीक, क्लोन विधियों का किया जा रहा उपयोग

देव शर्मा
करनाल। जलवायु परिवर्तन के इस दौर में अब देश के सामने पशुओं में दुग्ध उत्पादकता बढ़ाने की चुनौती है। इसे देखते हुए राष्ट्रीय डेयरी अनुसंधान संस्थान (एनडीआरआई) सहित देश के प्रमुख संस्थानों ने अनुसंधान का रुख कम पशुओं में अधिक दुग्ध उत्पादन की ओर किया है। इसके लिए क्लोन विधियों के साथ-साथ जीनोम एडिटिंग और सेक्स सॉर्टिंग जैसी अत्याधुनिक तकनीकों का उपयोग किया जा रहा है।
एनडीआरआई के अनुसार भारत लगातार दुग्ध उत्पादन में दुनिया में नंबर वन है। दुनिया में जितना कुल दुग्ध का उत्पादन होता है, उसमें भारत का योगदान 25 प्रतिशत तक हो गया है। ये एक बड़ी उपलब्धि है। देश का दुग्ध उत्पादन वर्ष 2014-15 में 146.3 मिलियन टन था, जो अब वर्ष 2023-24 में 239.2 मिलियन टन तक पहुंच गया है, ये वृद्धि औसतन 5.7 प्रतिशत वार्षिक है। जबकि वैश्विक दुग्ध उत्पादन की औसतन वृद्धि सिर्फ दो प्रतिशत है।
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एनडीआरआई के निदेशक एवं कुलपति डॉ. धीर सिंह के अनुसार भारत में प्रति व्यक्ति दुग्ध की उपलब्धता 471 ग्राम प्रति व्यक्ति है, जबकि वैश्विक दुग्ध उपलब्धता 322 ग्राम प्रति व्यक्ति है। इसमें भी भारत दुनिया में अग्रणी है। आगामी पांच वर्षों में दुग्ध उत्पादन 239.2 से 300 एमएमटी तक ले जाने का लक्ष्य रखा गया है। यही लक्ष्य वर्ष 2047 तक प्रति व्यक्ति एक लीटर करने पर एनडीआरआई सहित देश के सभी संबंधित संस्थान कार्य कर रहे हैं। एनडीआरआई करनाल ने ही पिछले वर्षों में कर्ण स्वीस और कर्ण फ्रीज नस्लें तैयार कीं, क्लोन विधि से भैंस की कटड़ी बनाई।
जलवायु परिवर्तन के कारण तापमान बढ़ रहा है, जिसमें कौन-कौन से पशु जलवायु सहनशील हैं, किसका दूध कितना प्रभावित होता है, इसका अध्ययन किया जा रहा है, प्रथम दृष्टया ये पाया गया कि विदेशी नस्लों के बजाय, देसी नस्लें अधिक जलवायु सहनशील हैं, जिनका संरक्षण करने के साथ ही कम पशुओं में दुग्ध की उत्पादकता बढ़ाने पर शोध किए जा रहे हैं।
सेक्स सॉर्टिंग तकनीक से गाय और भैसों में सिर्फ मादा यानी बछड़ी और कटड़ी ही पैदा हों, ऐसे प्रयास किए जा रहे हैं, क्योंकि बछड़े व कटड़े अब काम नहीं आते हैं, उन्हें लोग आवारा छोड़ देते हैं, जो कृषि और यातायात के लिए बाधक बनते हैं। इस तकनीक से वह पैदा ही नहीं होंगे। इसके लिए सीमेन सेक्स सॉर्टिंग तकनीक का टीका तैयार किया जा रहा है, जो सस्ता और पशुपालकों को सुलभ होगा। अभी ये टीका विदेशों से आता है, जो काफी महंगा है।
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जीन एडिटिंग तकनीक
दूसरी जीन एडिटिंग तकनीक हैं, इसके तहत जो सर्वाधिक दूध देने के लिए जिम्मेदार जीन हैं, उन्हें अन्य पशुओं में डालकर सांड तैयार किए जा रहे हैं, जिनके सीमेन से गर्भधारण के बाद भैंस अधिक दूध देंगी, तो उत्पादकता बढ़ेगी। भविष्य में पशुओं की संख्या भले ही कम हो जाए, लेकिन जो पशु उपलब्ध हों, उनमें दुग्ध उत्पादकता अधिक से अधिक हो, इसी प्रयास में अनुसंधान कार्य किए जा रहे हैं। ऐसे सांडों के क्लोन भी तैयार किए जा रहे हैं। जो पशु अभी तक क्लोन विधि से तैयार किए गए हैं, अब पशुपालकों को देकर उनकी टेस्टिंग भी की जा रही है।
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