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नौकरी छोड़ चुके लोगों के भी बिल बनाकर भेजता था सुखविंद्र

Thu, 14 Apr 2016 12:44 AM IST
ब्यूरो/करनाल,अमर उजाला
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एनडीआरआई - फोटो : अमर उजाला
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एनडीआरआई के निकरा प्रोजेक्ट में हुए गबन के मामले में मुख्य आरोपी सुखविंद्र सिंह की गिरफ्तारी के बाद कई अहम बातें सामने आई हैं। पहला यह है कि निकरा प्रोजेक्ट में 12 कर्मचारी काम करते थे, लेकिन एक साल से सुखविंद्र सिंह 21 लोगों के नाम प्रोजेक्ट में भेजता था और उनका वेतन खुद ही लेकर खर्च करता था। इसके अलावा, इस बात का भी खुलासा हुआ है कि सुखविंद्र नौकरी छोड़ चुके लोगों के नाम भी कर्मचारियों की लिस्ट में जोड़ देता था और उनके बिल बनाकर भेज देता था।
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इन कर्मचारियों के नामों के आगे वह खुद ही हस्ताक्षर करता था या फिर अपने जानकारों से साइन करा लेता था। सुखविंद्र ने इसमें अपने भाई विक्रम और प्रेमिका मनप्रीत कौर का साथ लिया और संस्थान के कर्मचारी अमरेंद्र श्रीवास्तव और दीपक को भी अपने साथ मिलाया। प्रारंभिक जांच में पुलिस ने सुखविंद्र सिंह को ही इस पूरे प्रकरण का मास्टर माइंड बताया है, हालांकि पुलिस कई पहलुओं से केस की जांच कर रही है। एसपी पंकज नैन का दावा है कि अभी जांच के दौरान और खुलासे हो सकते हैं। ऐसे में अभी संस्थान के अधिकारियों से भी अभी जांच की तलवार हटी नहीं है। पुलिस को उम्मीद है कि तीन दिन के रिमांड पर सुखविंद्र कई अहम खुलासे कर सकता है। अभी उसकी निशानदेही पर छापेमारी की जाएगी।

गिरफ्तारी के बाद पूछताछ में सामने आया है कि प्रोजेक्ट में 12 कर्मचारी काम करते थे, लेकिन सुखविंद्र ने कागजों में कभी 12 नहीं दिखाए, बल्कि दोगुणा कर्मचारी दिखाए। पुलिस का कहना है कि सुखविंद्र पहले नियत कर्मचारियों की लिस्ट पर हस्ताक्षर कराता था और बाद में उसमें अन्य लोगों के नाम जोड़ देता था। हालांकि, यह बात लोगों को हजम नहीं हो रही है। बावजूद इसके पुलिस यह मानती है कि संस्थान से 1.23 करोड़ गबन मामले का पूरा खेल सुखविंद्र ही चला रहा था। अब रिमांड के दौरान सुखविंद्र से कई और खुलासे होने की उम्मीद है। अन्य फरार चल रहे आरोपियों की गिरफ्तारी और शेष राशि बरामद करना अब पुलिस का टारगेट है। साथ ही कहीं इस प्रकरण में संस्थान के किसी अधिकारी की मिलीभगत तो नहीं, इस बात को लेकर भी पुलिस जांच कर रही है। एसपी पंकज नैन का कहना है कि जांच जारी है, अगर किसी भी अधिकारी की मिलीभगत मिली तो यकीनन उसके खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाएगी। जल्द ही अन्य आरोपियों को भी काबू कर लिया जाएगा।
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तीन साल पहले प्रोजेक्ट में आया था आरोपी
निकरा प्रोजेक्ट वर्ष 2011 में शुरू हुआ था। इस प्रोजेक्ट का उद्देश्य मौसम में बदलाव होने के कारण तापमान बढ़ने का पशुओं पर होने वाले असर की जांच करना है। इस वर्ष मार्च तक इसका बजट करीब पांच करोड़ रुपये था। यह प्रोजेक्ट सात साल के लिए है और यह वर्ष 2017 तक चलेगा। इस समय इस प्रोजेक्ट के इंचार्ज डॉ. एसवी सिंह हैं। प्रोजेक्ट के दौरान रिसर्च एसोसिएट रखे जाते हैं, जो रिसर्च में मदद करते हैं, आरोपी सुखविंद्र इस प्रोजेक्ट में इसी पद पर तीन साल पहले आया था। प्रोजेक्ट के दौरान शोध में संस्थान के वैज्ञानिकों ने शोध में पाया है कि देशी नस्ल की गायों में तापमान को सहने की विदेशी पशुओं के मुकाबले ज्यादा क्षमता है।

प्रोजेक्ट का पूरा अकाउंट सुखविंद्र के पास था
सीआईए से पूछताछ में सुखविंद्र ने माना है कि वह ज्यादा कर्मचारियों के बिल बनाकर भेजता था और जो उनका वेतन आता था, उसे वह प्रयोग करता था। जांच में यह बात भी साफ हुई है कि निकरा प्रोजेक्ट का पूरा अकाउंट व पैसे से संबंधित काम रिचर्स एसोसिएट सुखविंद्र ही करता था। तीन साल पहले संस्थान में कांट्रेट पर नौकरी शुरू करने वाले सुखविंद्र ने धीरे-धीरे संस्थान में अपने पैर जमाए और अकाउंट का अच्छा ज्ञान होने के कारण वह अधिकारियों को भी भा गया। एमबीए डिग्री धारक सुखविंद्र ने इस दौरान संस्थान के कर्मचारियों और अधिकारियों से अच्छा रसूख बनाया। इसी के बलबूते पर उसने यह ठगी का खेल खेला।
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