करनाल। रविवार (21 सितंबर) को सर्वपितृ अमावस्या यानी आश्विन माह की अमावस्या है। इसी दिन सूर्यग्रहण भी है। इस दिन खंडग्रस्त सूर्यग्रहण का समय भारतीय समय के अनुसार रात्रि 10:59 से सुबह 3:30 बजे तक रहेगा। यह ग्रहण भारत में दिखाई नहीं देगा। इसका असर केवल ऑस्ट्रेलिया और दक्षिण भाग न्यू फिजी आदि देशों पर रहेगा।
ज्योतिषाचार्य बताते हैं कि इस दिन भी पितरों का तर्पण किया जा सकता है। ग्रहण के सूतक में भी तर्पण किया जा सकेगा। श्री श्याम बाला जी ज्योतिष केंद्र के संचालक पंडित विनोद शास्त्री के अनुसार सर्वपितृ अमावस्या वह विशेष तिथि है, जब पितृपक्ष के अंतिम दिन सभी पूर्वजों के लिए श्राद्ध और तर्पण किया जाता है। सूर्यग्रहण के समय सूर्य की शक्ति कम हो जाती है, जिससे पितृ तर्पण और पूजा का प्रभाव अधिक गहरा माना जाता है।
उन्होंने बताया कि इस संयोग में श्राद्ध, तर्पण, दान और पितृ पूजन का महत्व सामान्य दिनों की तुलना में कई गुना बढ़ जाता है। श्रद्धालु इस दिन पूरे नियम-विधान और श्रद्धा से पितरों का तर्पण करें, ताकि पितरों की आत्मा को शांति मिले और उनका आशीर्वाद आपके परिवार पर बना रहे।