लाडवा खंड के गांव लाठी धनौरा में 9 जनवरी को झुलसी एक विवाहिता की पीजीआई में मौत के बाद गांव में माहौल तनावपूर्ण हो गया। मृतका के मायके पक्ष के लोग ससुराल पक्ष के लोगों की गिरफ्तारी तक दाह संस्कार न करने की जिद पर अड़ गए।
लाडवा थाना प्रभारी ने दलबल सहित मौके पर स्थिति को नियंत्रित किया। इस दौरान पुलिस सात आरोपियों में से तीन महिलाओं और तीन पुरुषों को जांच के लिए थाने ले गई।
विवाहिता ने रविवार रात पीजीआई चंडीगढ़ में दम तोड़ा। ससुराल वाले शव को लेकर जैसे ही गांव की सीमा पर पहुंचे तो मायके पक्ष के लोगों ने लाश को वहीं रोक दिया और जाम जैसी स्थिति बन गई।
घटना की जानकारी मिलते ही लाडवा थाना प्रभारी नरेंद्र कुमार भारी दलबल के साथ घटनास्थल पर पहुंचे और मृतका के परिजनों को समझा-बुझा कर अंतिम संस्कार करवाने बारे कहा। मृतका के परिजन इस बात पर अड़ गए कि जब तक आरोपियों को गिरफ्तार नहीं किया जाता तब तक वह अंतिम संस्कार नहीं होने देंगे।
मृतका के पिता सुरेश कुमार ने कहा कि उनकी बेटी के जलने की जानकारी उसकी ससुराल वालों ने उन्हें नहीं दी। उन्हें किसी रिश्तेदार के माध्यम से इस बारे में जानकारी मिली।
वहीं विवाहिता के पति राजकुमार की बुआ निर्मला ने बताया कि 9 जनवरी को बच्चों को लेकर सास-बहु में मामूली कहासुनी हुई थी। इसके चलते सास अपने दोनों पोतों को लेकर पड़ोस में चली गई थी।
थोड़ी देर में शोर मचा कि विवाहिता ने मिट्टी का तेल छिड़कर आग लगा ली। विवाहिता का पति उस समय किसी किसान के खेत में गन्ना छिलाई के लिए गया हुआ था।
मामले को बढ़ता देख डीएसपी निर्मल सिंह गांव में पहुंचे और दोनों पक्षों के लोगों को अंतिम संस्कार करवाने के लिए समझाने की कोशिश की। डीएसपी निर्मल सिंह ने बताया कि मामले में 7 आरोपियों में से तीन महिलाओं और तीन पुरुषों को जांच व पूछताछ के लिए लाडवा थाना ले जाया गया है और मामले की जांच जारी है।