जनवरी के आधे महीने तक ठंड का इंतजार कर रहे लोगों को अब ठंड ने ठिठुरने पर मजबूर कर दिया है। पिछले एक सप्ताह से तापमान में गिरावट के साथ ठंड ने सीजन में इस बार दस सालों का रिकॉर्ड तोड़ दिया है। इस बार जनवरी में तापमान ने अधिकतम व न्यूनतम दोनों रिकॉर्ड बनाए हैं।
जनवरी के प्रथम सप्ताह तक शहर का औसतन तापमान 20 डिग्री तक रहने से जहां लोगों को मार्च माह जैसा एहसास हो रहा था। लेकिन मौसम में 15 दिनों में हुए असामान्य बदलाव ने ठंड के सारे रिकॉर्ड तोड़ दिए हैं। 22.9 डिग्री सेल्सियस तापमान के साथ पांच जनवरी का दिन दस सालों के रिकॉर्ड में अब तक का सबसे गर्म दिन रहा है। वहीं मौसम में हुए असामान्य बदलाव के बाद 15 दिनों में ही अधिकतम तापमान में 12 डिग्री की रिकॉर्ड गिरावट दर्ज की गई है। 21 जनवरी को शहर का अधिकतम तापमान अबतक के सबसे निचले स्तर 10 डिग्री तक पहुंचा है, जो पिछले दस सालों में अब तक का सबसे कम तापमान है। इस बार न्यूनतम तापमान में भी 2.2 डिग्री के साथ अब तक का सबसे कम तापमान रहा है।
मौसम विभाग की माने तो पिछले दस सालों के रिकॉर्ड में पहली बार मौसम में असामान्य बदलाव देखने को मिले हैं। पांच जनवरी तक शहर का अधिकतम तापमान 22.9 डिग्री तक रहने के बाद 15 दिनों में ही रिकॉर्ड गिरावट के साथ इस सीजन के सबसे निचले स्तर 10 डिग्री तक पहुंचा है। अधिकतम तापमान में यह गिरावट वर्ष 2008 में देखने को मिली थी। इसके बाद इतने कम समय में तापमान इतनी गिरावट कभी नहीं आई है।
मौसम में अचानक हुए बदलाव का असर लोगोें के स्वास्थ्य पर भी पड़ा है। पिछले एक सप्ताह से अस्पताल में ठंड के मरीजों की संख्या कई गुना बढ़ गई है। हालांकि इस ठंड से किसानों को जरूर राहत मिली है। लेकिन मौसम विभाग ने मौसम हुए इस असामान्य बदलाव का कारण मनुष्य द्वारा प्रकृति से की गई छेड़छाड़ बताया है।
पांच जनवरी को रहा था सीजन का सबसे गर्म दिन
इस बार सर्दी के सीजन की शुरु आत में शहर का औसतन तापमान में करीब 20 डिग्री तक रहा है। 22.9 डिग्री के साथ पांच जनवरी सीजन का सबसे गर्म दिन रहा। मौसम विभाग के मुताबिक पिछले दस सालों के रिकॉर्ड में ऐसा पहली बार हुआ है। जनवरी माह में वर्ष 2005 से 2016 तक यह पहला मौका था कि शहर का अधिकतम तापमान 22.9 डिग्री तक पहुंचा था। इससे पहले दस सालों के इतिहास में जनवरी के महीने में अधिकतम तापमान 18.0 डिग्री सेल्सियस से ऊपर नहीं गया गया है। मौसम में ऐसा असामान्य परिवर्तन काफी साल के बाद देखने को मिल रहे हैं।
निमोनिया, दमा के मरीजों की संख्या बढ़ी
मौसम में हुए असामान्य बदलाव का असर लोगों के स्वास्थ्य पर भी पड़ा है। पिछले एक सप्ताह से अस्पतालों में ठंड के मरीजों की संख्या कई गुना तक बढ़ गई है। ठंड का सबसे अधिक असर बुजुर्गों व बच्चोें पर पड़ा है। अस्पताल के शिशु वार्ड में निमोनिया से पीड़ित बच्चों की संख्या की गई गुना तक बढ़ गई है। वहीं बुजुर्ग भी ठंड की चपेट में आए हैं।
डॉ. संजीव कपूर ने बताया कि ठंड की वजह से अस्पताल में मरीजों की संख्या कई गुना तक बढ़ गई है। सर्दी के मौसम में अस्पताल की औसतन ओपीडी आठ सौ से एक हजार तक रही है। लेकिन ठंड की वजह से अस्पताल की ओपीड़ी 1500 तक पहुंच गई है। यदि सर्दी का सिलसिला यूं ही चलता रहा तो इसमें ओर अधिक इजाफा होने की संभावना है। उन्होंने बताया कि ठंड की वजह से निमोनिया, दमा व सीजनल इंफेक्शन के मरीजों की संख्या में इजाफा हुआ है।
जनवरी में आठ सालों का तापमान रिकॉर्ड
वर्ष : अधिकतम : न्यूनतम
2009 : 20.0 : 7.3 डिग्री
2010 : 11.4 : 7.5 डिग्री
2011 : 19.8 : 7.2 डिग्री
2012 : 16.4 : 6.2 डिग्री
2013 : 17.5 : 3.6 डिग्री
2014 : 14.5 : 10.2 डिग्री
2015 : 13.5 : 9.4 डिग्री
2016 : 11.4 : 2.2 डिग्री
नोट यह आंकड़े आईएमडी द्वारा जारी किए गए हैं।
-----
ठंड का रबी की फसलों को होगा लाभ
घरौंडा। इस बार सर्दी का आगाज देरी से हुआ है। लेकिन रबी की फसलों को इस ठंड का सबसे अधिक फायदा होगा। कृषि विभाग के वैज्ञानिकों के अनुसार गेहूं की फसल के लिए उपयुक्त तापमान में 18 से तीन डिग्री होता है। लेकिन इस बार दिसंबर व जनवरी के प्रथम सप्ताह तक शहर का अधिकतम औसतन तापमान 20 डिग्री रहा है। वहीं न्यूनतम तापमान भी औसतन सात डिग्री रहा है। मौसम गर्म रहने असर फसलों पर भी पड़ा है। लेकिन पिछले 15 दिनों से मौसम में हुए बदलाव को बाद बढ़ी ठंड से फसलों का लाभ होगा।
गांव फुरलक के किसान समेर सिंह मलिक ने बताया कि गेहूं की फसल की ग्रोथ के लिए जितनी ठंड पड़नी चाहिए थी। उसके अनुमान के हिसाब से ठंड नही पड़ रही है। उन्होंने बताया कि पिछले तीन चार दिनों से पड़ रही ठंड से काफी हद तक राहत मिली है। यह ठंड गेहूं की फसल के लिए वरदान साबित हो रही है। वहीं खंड कृषि अधिकारी डॉ. रामपाल ने बताया कि गेहूं में 65 दिन के बाद तीसरा पानी दिया जाता है। 21 जनवरी को वे दिन पूरे हो गए हैं। यदि अब बारिश हो जाए तो किसानों को काफी हद तक राहत मिल सकती है।