- दोगुने दामों पर बाहर से दवा लेने को मजबूर मरीज
संवाद न्यूज एजेंसी
करनाल। नागरिक अस्पताल में पिछले साढ़े तीन माह से टीबी की पूरी दवाइयां नहीं मिलने के कारण मरीजों को परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। मरीज हर रोज अस्पताल के चक्कर लगा रहे हैं। उन्हें जहां पहले दवाइयों के पत्ते दिए जाते थे अब सिर्फ दो या तीन गोली ही डॉट सेंटर से दी जा रही है। एक तरफ स्वास्थ्य विभाग टीबी मुक्त भारत अभियान-2025 के लक्ष्य तक पहुंचने पर जोर दे रहा है। दूसरी ओर दवा उपलब्ध न होने से मरीजों को परेशानी का करना पड़ रहा है। ऐसे में मरीजों को दोगुने दाम पर मेडिकल स्टोरों से दवा लेनी पड़ रही है।
स्वास्थ्य विभाग से मिले आंकड़ों के अनुसार जिले में पिछले साढ़े तीन माह में 1434 नए मरीज टीबी से ग्रस्त पाए गए हैं। जिसमें एमडीआर के 48 मरीज भी शामिल हैं। इन सभी मरीजों को स्वास्थ्य विभाग की ओर से निशुल्क दवाइयां मुहैया कराई जाती है। पहले यह दवाइयां पंचकूला स्थित कार्यालय से आती थी, लेकिन अब यह दवाइयां जिला स्तर पर खरीदी जा रही है। इस कारण मरीजों को पिछले साढ़े तीन महीने से दवाइयां नहीं मिल पा रही हैं और मरीज पर्याप्त खुराक नहीं ले पा रहे हैं।
इसको लेकर मरीज काफी परेशान हैं और दवाओं को लेकर कई बार अस्पतालों के चक्कर काटने पड़ रहे हैं। एक तरफ सरकार से दवा नहीं मिल रही है दूसरी ओर प्राइवेट केमिस्टों के पास दवा न होने के कारण मरीज अपना टीबी का कोर्स पूरा नहीं कर पा रहे हैं। ऐसे में सामान्य टीबी के मरीजों में टीबी का खतरा अधिक बढ़ रहा है।
टीबी मुक्त भारत अभियान पर असर
टीबी मुक्त भारत अभियान-2025 का समय नजदीक आ रहा है लेकिन प्रदेश में पिछले साढ़े तीन माह से दवाओं का स्टाॅक खत्म है और मरीज टीबी का कोर्स पूरा नहीं हो पा रहे हैें। जिस कारण सामान्य टीबी से गंभीर टीबी की चपेट में मरीज आ रहे हैं। ऐसे में केंद्र सरकार के टीबी मुक्त भारत अभियान को झटका लग रहा है।