अंबाला सीट पर 1999 में रतनलाल कटारिया पहली बार भाजपा की टिकट पर सांसद बने थे। उसके बाद दो बार कुमारी सैलजा से शिकस्त खाने के बाद मोदी लहर में कटारिया वर्ष 2014 और 2019 में फिर सांसद बने। इस दौरान बंतो कटारिया भी रतनलाल के साथ उनके सियासी सफर में पूरी तरह सक्रिय रही। भाजपा ने बंतो को कई महत्वपूर्ण पदों पर आसीन रखा और इस वक्त भी बंतो प्रदेश भाजपा की उपाध्यक्ष और कुरुक्षेत्र की प्रभारी हैं।
18 मई 2023 को अचानक मौजूदा सांसद रतनलाल कटारिया के निधन के बाद अंबाला सीट खाली हो गई। इस सीट पर उपचुनाव की अटकलें चलती रहीं मगर उपचुनाव नहीं हो पाया। इसी दौरान 29 जून को रक्षामंत्री राजनाथ सिंह अंबाला लोकसभा क्षेत्र के अंतर्गत यमुनानगर रैली में बंतो के सिर पर हाथ रखकर वहां मौजूद लोगों के समक्ष यह कह गए थे कि ‘यह बेटी अब आपके हवाले है।’ तभी से यह तस्वीर लगभग साफ हो गई थी कि वर्ष 2024 के लोकसभा चुनाव में भाजपा अंबाला सीट से बंतो को ही मैदान में उतारकर सहानुभूति कार्ड खेल सकती है।
उधर करनाल सीट पर राजनीतिक परिदृश्य काफी हद तक जातिगत फेक्टर के इर्द-गिर्द घूमता है। करनाल क्षेत्र के अंतर्गत पानीपत जिला भी आता है। इस क्षेत्र में चुनाव के दौरान पंजाबी मतदाता निर्णायक माना जाता है। वर्ष 2014 व 2019 में भाजपा ने इस सीट पर पंजाबी प्रत्याशी को ही लोकसभा का टिकट देकर उतारा था और जीत हासिल की थी। अब 2024 में इस सीट पर भाजपा ने अपनी पुरानी रणनीति के तहत ही एक बार फिर पंजाबी प्रत्याशी पर ही दांव खेला है। अब देखना यह है कि अंबाला और करनाल सीट पर भाजपा की रणनीति कितनी सटीक बैठती है।