- सेक्टर-32 में 44 लाख रुपये की लागत निर्मित इंडोर स्टेडियम निजी संचालकों को सौंपा, वसूल रहे मनमानी फीस
संवाद न्यूज एजेंसी
करनाल। शहर के सेक्टर-32 में 44 लाख रुपये की लागत से निर्मित इंडोर ऑल वैदर स्विमिंग पूल में अभ्यास के लिए जिले के तैराक तरस रहे हैं। स्मार्ट सिटी परियोजना से निर्मित इस पूल को जिला प्रशासन की ओर से निजी हाथों में सौंप दिया गया है। अब राष्ट्रीय व अंतरराष्ट्रीय स्तर पर बेहतरीन प्रदर्शन करने वाले खिलाड़ियों से भी उसमें अभ्यास के लिए साल के 28 से 30 हजार रुपये वसूले जा रहे हैं।
विदित हो कि 50 गुणा 25 वर्ग मीटर के मल्टी स्वीमिंग पूल और 25 गुणा 21 वर्ग मीटर के वॉर्मअप पूल के लिए इंडोर हॉल निर्मित होने से पहले जिला प्रशासन की ओर से दावा किया गया था कि तैराकों को उन्हीं के शहर में अंतरराष्ट्रीय स्तर का 16 लेन का ऑल वैदर स्विमिंग पूल अभ्यास के लिए मिलेगा। तब यह भी कहा गया था कि इस पूल में रोजाना अभ्यास से जिले में ऐसे बेहतर तैराक तैयार होंगे जो अभ्यास न होने से राष्ट्रीय व अंतरराष्ट्रीय स्तर की प्रतियोगिताओं में पिछड़ जाते थे।
उससे पहले तैराकों के लिए यह भी समस्या रहती थी कि कर्ण स्टेडियम में एकमात्र स्वीमिंग पूल होने के कारण तैराकों को गर्मियों के दिनों में तीन से चार माह तक ही अभ्यास के लिए समय मिलता था। ऐसे में करनाल के तैराक अभ्यास नहीं कर पाते थे। उस समय प्रशासन की ओर से यह भी दावा किया गया था कि जिले में यह अंतरराष्ट्रीय पूल प्रदेश का एकमात्र ऐसा पूल होगा जो राष्ट्रीय व अंतरराष्ट्रीय स्तर की प्रतियोगिताओं के लिए भी बेहतर मंच होगा।
जिले के खिलाड़ियों के साथ-साथ प्रदेशभर के राष्ट्रीय व अंतरराष्ट्रीय खिलाड़ियों के लिए बने इस ऑल वैदर स्विमिंग पूल में अब अमीर घरानों व बड़े व्यवसायियों के बच्चे ही शौकिया तौर पर तैराकी के लिए पूल में आ रहे हैं। निजी कंपनी को सौंपे गए पूल व जिम में मध्यम वर्ग के युवाओं के लिए दाखिला ले पाना भी उनकी पहुंच से बाहर है।
प्रशासन व विभाग के अधिकारी झाड़ रहे पल्ला
ऑल वैदर स्विमिंग पूल को निजी संचालकों से छुड़ाकर खेल विभाग को सौंपने से प्रशासन के अधिकारी व विभाग अध्यक्ष भी पल्ला झाड़ रही हैं। राष्ट्रीय, अंतरराष्ट्रीय व पैरा तैराकों को अभ्यास के लिए इस पूल की सुविधा न मिलने से खिलाड़ियों में मायूसी है तो उनके अभिभावकों में भी इस बात के लिए रोष है कि सरकार की ओर से बेहतर तैराक तैयार करने के लिए इस महत्वपूर्ण परियोजना पर लाखों रुपए खर्च किए गए। बावजूद इसके इसके निजी संचालकों को सौंपना और उनके द्वारा मनमाने रेट वसूली गलत है।